अगर सफलता चाहते हैं तो सफल लोगों से दोस्ती कीजिये।

बंधुओं अगर आप सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो सिर्फ और सिर्फ सफल लोगों से दोस्ती कीजिये।  असफल लोग चाहे कितना भी योग्य क्यों न हो आपके सफलता में बाधक ही होंगे।  इसलिए जहॉं तक संभव हो असफल लोगों से दूर रहे।  आप अपनी असफलताओं का कारण आप स्वयं ढूॅंढ़ सकते हैं, दूसरा नहीं बता सकता है।  अगर आप असफलता का कारण ढूॅंढ़ लिये हैं तो उसका निदान या तो आप स्वयं कर सकते हैं या कोई आपके क्षेत्र के सफल व्यक्ति।  असफल व्यक्ति आपको नकारात्मक बातें ही बतायेंगे।  असफल व्यक्ति के संपर्क में लगातार रहने से आपके भी सोच नकारात्म हो जायेगी।  जिसका परिणाम असफलता के अलावा कुछ भी नहीं हो सकता है।

रोगों के बारे में अध्ययन कर स्वास्थ्य की परिकल्पना नहीं की जा सकती।  गरीबी का अध्ययन कर अमीर नहीं बना जा सकता है।  इसी वजह से आयुर्विज्ञान के विकास के वावजूद भी संसारभर में तरह—तरह के रोग मौजूद हैं।  और रोज नये—नये रोग उत्पन्न हो रहा है।  एक से एक अर्थशास्त्री होने के बावजूद भी गरीबी आज भी दुनियाभर में कायम है। ठीक इसी तरह हम असफलता के बारे में गंभीर विचार—विमर्श, चिंतन—मनन करने से असफलता ही हाथ लगेगी, सफलता नहीं।

अगर आपको अमीर पसंद नहीं हैं तो आप अमीर कभी नहीं बन सकते है।  अगर आपको अमीर बनना है तो अमीर और अमीरी दोनों से प्रेम करना होगा।  ज्यादातर लोग अमीर बनना तो चाहते हैं पर जाने—अंजाने में वे गरीबों की बड़ाई और अमीरों की बुराई में लगे रहते हैं।  फलत: वे जीवने में कभी अमीर नहीं बन पाते हैं और बाद में अपने भाग्य को कोसते हैं।  इसे विधि का विधान मानते हैं।  उन्हें ऐसा लगात है कि उनके भाग्य में अमीर बनना नहीं लिखा था।  प्रयास और परिश्रम तो उसने पूरा किया था।

महामारी और छूत की बिमारी से सभी अवगत हैं ।  असल में महामारी या संक्रामक रोग नहीं भी हो फिर भी बिमारों के बीच एकम स्वस्थ व्यक्ति भी लंबे समय ते रहे तो वे भी अस्वथ जो जायेगा।  इसे विपरीत स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क रहकर एक अस्वथ व्यक्ति भी अपनी दिनचर्या, आचार—विचार, खान—पान इत्यादि में आवश्यक बदलाव कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो जाता है।

असल में हम पहले माहौल बनाते हैं फिर माहौल हमें बनाता है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपने जैसे लोगों से दोस्ती एवं संपर्क रखते हैं।  असफल लोगों अपनी असफलता का कारण अपने अलावा दुनिया के हरएक संभव कारण बता देता है, और पूरी मनोयोग से अपनी भावी पीढ़ी को वे सभी गुर सिखाते हैं, जिन्हें अजमाकर वे असफल हुए हैं।  बंधुओं अगर हम बीमार होते हैं तो एक सफल डॉक्टर के पास जाते हैं न कि एक असफल डॉक्टर या ऐसे व्यक्ति के पास जो मेडिकल इंट्रेंस में ही असफल हो गया हो। यह भी याद रखें जब हम बीमार होते हैं तो यार—दोस्त या सगे संबंधी जो डॉक्टर नहीं हैं, कई सारे नुक्से या दवाईयॉं बता देते हैं बिना किसी फीस के पर असल में जो डॉक्टर है वे पहले अपना फीस वसूलते हैं और बाद में ईलाज शुरू करते हैं।  जीवन में हरकदम यही होता है। असफल लोग हमें सलाह देने के लिए हरसमय उपलब्ध रहते हैं। अगर आपको सफल होना है तो सफल लोगों से  ही संगत कीजिये। अगर सफल लोगों से सलाह लेने के लिए कुछ खर्च भी करना पड़े तो अवश्य करें।  यह निवेश आपको कई गुणा अधिक लाभदायक होगा।
संजय कुमार निषाद

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