लोगों को प्रोत्साहित कीजिए।

जो लोग दुनिया को बेहतर बना रहे हैं और आगे बढ़ा रहे हैं, वे आलोचना कम, प्रोत्साहित अधिक करते हैं।
— एलिज़ाबेथ हैरिसन

मेरा चापलूसी करेंगे, तो शायद मैं आपकी बात का विश्वास नहीं करूॅंगा। मेरी आलोचना करेंगे, तो शायद मैं आपको पसंद नहीं करूॅंगा। मुझे अनदेखा करेंगे, तो शायद मैं आपको क्षमा नहीं करूॅंगा। मुझे प्रोत्साहित करेंगे, तो मैं आपको कभी भूल नहीं पाउॅंगा।
—विलियम आर्थर फ़ोर्ड

जी हॉं, प्रोत्साहन में अनंत शक्ति होती है। यह सफलता का उत्प्रेरक है। प्रेरणा का इंजन है। सबसे बड़ी बात यह दुनिया में महान नेता तैयार करने वाला इंधन भी है। अविकसित और अल्पविकसित परिवार, समाज, राज्य और देश में प्रोत्साहन की परिपाटी नगण्य होता है। परिणामत: अगुवाई करनेवाले लोगों की कमी होती है। आप कोई काम शुरू करें। शुरूआत में आपको ही पता नहीं है कि काम अच्छा है, बुरा है। परिणाम अच्छा होगा या बुरा होगा। यह काम लाभदायक है या हानिकारक है इत्यादि। यानि आप काम शुरू ही किये हैं यहॉं तक आप काम शुरू करने ही वाले हैं और कुछ लोगों को जैसे परिवार के सदस्य, सगे—संबंधियों या शुभचिंतकों को इसके बारे में बताये हों। लोगों का तत्काल नकारात्मक प्रतिक्रिया आपको प्राप्त हो जायेगी। मसलन, फलॉं व्यक्ति यही काम शुरू किये थे। बरबाद हो गये । पूूॅंजी चौपट हो गई। या इस प्रतियोगिता में तो आजकल लाखों लोग भाग लेते हैं। अच्छे—अच्छों को सफलता हाथ नहीं लगी तो तुम किस खेत की मूली हो। उस रिश्तेदार का लड़का या लड़की काफी परिश्रम एवं धन बरबाद किया लेकिन सफल नहीं हो सका/सकी। आजकल भ्रष्टाचार का बोलबाला है, इत्यादि । मुफ्त में घंटों वे सारी बाते आपको बतायी जाएगी कि यह काम आप क्यों नहीं करें। जैसे सामने वाला उसी काम पर डॉक्टरेट कर रखी हो जो काम आप करने जा रहे हैं। सच तो यह है कि आज किसी विषय के नकारात्मक पहलू पर कई लोग, कई घंटे, कई—कई दिन लगातार बोल सकते हैं, लेकिन उस विषय के सकारात्मक पक्ष पर कोई शायद दो शब्द बोलने के लिए तैयार हो ।

हमलोग दिनभर अपने आपको व्यस्त रखते हैं। पढ़े—लिखे और निरक्षर भी दुनियाभर की खबर रखते हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। प्रिंट मीडिया और ईलेक्ट्रोनिक मीडिया पर तो पहले से ही सक्रिय थे। हम अपडेट हैं और लगातार हो रहे हैं। सामने वाला शुरू किया नहीं कि हम अपनी एक्सपर्ट राय तुरत दे देते हैं। और लगातर बोलकर सामने वाला को निशब्द करने की योग्यता रखते हैं।

सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट प्रकाशित हुआ नहीं कि तुरंत हम अपनी नकारात्मक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिये। जैसे हम तो लड़ने कि लिए पहले से तैयार बैठे थे आप भारी गलती कर बैठे पोस्ट डालने में देर करके वर्णा आप तो काफी पहले पराजित हो जाते। कई उच्च पदस्थ लोगों में भी यह आदत है। हलॉंकि इसे श्रेष्ठता की पहचान नहीं कह सकते हैं। हम अपने को सही और सामने वाला को गलत साबित करने का हरसंभव प्रयास में जुट जाते हैं। कई बार तो सामनेवाला को कहने का मौका दिये बगैर, सामनेवाला का पोस्ट या लेख को पूरा पढ़े बगैर हम अपनी प्रतिक्रिया इस तरह दे देते हैं कि बोलने वाला या लिखने वाला कहीं न कहीं वास्तव में गलत है।

आज दुनियाभर में हलचल है। साफ शब्दों में कहा जाये तो बुरे लोगों की संख्या एवं दबदबा बढ़ रहे हैं। बुरे लोगों की बुराई से उतनी हानि नहीं होती जितनी कि अच्छे लोगों द्वारा अच्दे लोगों का साथ नहीं देने के कारण। बुराई मिटानी है तो बुराई के नाश करने के तरीके मत खोजिये। अच्छाई को फलने—फूलने का अवसर दीजिये। अंधेरा का होना सत्य नहीं है बल्कि उजाला का नहीं होना सत्य है। यानि अंधेरा होता नहीं है बल्कि प्रकाश के नहीं होने के कारण अंधेरा सा लगता है। कभी अंधेरा मिटाने का प्रयास कीजिये। असंभव है। छोटी सी मोमबत्ती जला दिजिये। अंधेरा गायब। यह आसान खेल है मगर इससे सीखने के लिए बहुत कुछ है। हम अंधेरा मिटा नहीं सकते। प्रकाश फैला सकते हैं। हम बुराई मिटा नहीं सकते हैं। अच्छाई कायम कर सकते हैं। और अच्छाई कायम करने के लिए हमें सिर्फ और सिर्फ अच्छाई के बारे में सोचना, सुनना, पढ़ना एवं अमल करना होगा। सबसे प्रमुख बात अच्छे लोगों को प्रोत्साहित करना होगा। अच्छे लोगों को संरक्षित करना होगा।

बच्चों से अगर अच्छे परिणाम की उम्मीद रखें हैं तो उन्हें प्रोत्साहित कीजिये। हर कदम पर प्रोत्साहित कीजिये। यदि वह चालीस प्रतिशत अंक लाया है तो भी प्रोत्साहित कीजिये,क्योंकि वे चालीस प्रतिशत अंक लाकर भी उन सभी बच्चों से अच्छा है जिन्होंने चालीस प्रतिशत से कम अंक लाये हैं। आपका यह प्रोत्साहन उन्हें और अच्छा करने के लिए उत्साहित करेगा। एक कहावत है कमी ढूॅंढ़ने वाले तो चॉंद में दाग ढॅूॅंढ लेते हैं। जिस प्रकार अंधेरा नहीं होता बल्कि प्रकाश की अनुपस्थिति को अंधेरा कहते हैं। उसी प्रकार निर्बल या अयोग्य संसार में किसी को ईश्वर नहीं बनाकर भेजे हैं। अपने बल और योग्यता में बृद्धि नहीं करना ही निर्बलता एवं अयोग्यता है।

इसीलिए मैं तो कहूॅंगा कि बच्चों को, स्वयं को, अपने शुभचिंतकों को या किसी भी कर्मशील व्यक्ति को उनके हर प्रयास के लिए प्रोत्साहित कीजिए, प्रोत्साहित कीजिए और प्रोत्साहित कीजिए।

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