जीवन में प्रगति के लिए लगातार अध्ययन की आवश्यकता क्यों है?

पुस्तकप्रेमी अच्छी तरह जानते हैं कि जीवन में प्रगति करने के लिए लगातार ज्ञान अर्जित करते रहना आवश्यक है, और यह भी कि ज्ञान का अंत नहीं है। यानि असीमित ज्ञान या पूर्ण ज्ञान हासिल करने का इस संपूर्ण विश्व में किसी में भी सामर्थ्य नहीं है। सुखद बात तो यह है कि ज्ञान् हासिल करना आजकल पुराने समय के तरह दुश्कर एवं खर्चीला भी नहीं है। इसके कई साधनों में से पुस्तकें सबसे सस्ती एवं सर्वसुलभ है। आप जब चाहें, जहां चाहे इसका अघ्ययन कर सकते हैं। वैसे तो हम ज्ञान अनुभव से भी हासिल कर सकते हैं, लेकिन इसमें पेरशानी यह है कि अनुभव द्वारा ज्ञान हासिल करने के लिए हमारा एक जीवनकाल काफी छोटा पड़ जायेगा। एक जीवनकाल नहीं अपितु हजारों जीवनकाल भी कम पड़ जायेगा। इसलिए करोड़ों लोगों के अनुभवों को संग्रहित किए पुस्तकों का ही अघ्ययन करना उपयोगी एवं हमारी विवशता भी है।

लगातार अध्ययन करना क्यों जरूरी है— इस विषय पर अब हम थोड़ी सी चर्चा करते हैं। हम चाहे सरकारी सेवा करते हों या निजि क्षेत्रों में कार्य करते हों, व्ययपार या कृषि कार्य में करते हों। सेवा यानि नौकरी चाहे सरकारी हो या निजि क्षेत्र में, एक बात हम बड़ी आसानी से देख सकते हैं कि जिनके पास जितना ज्यादा ज्ञान है, उनकी उतनी ज्यादा वेतन है। हम सिर्फ डिग्री की बात नहीं कर रहे हैं। अगर डिग्री की बात करें तो एक ही तरह की डिग्री लिए हुए हजारों लोग क्लर्क बनते हैं और कुछ लोग अधिकारी बनते हैं। वे दोनों स्कूलों और कॉलेजों के दिनों में लगभग एक जैसी पुस्तकों का अघ्ययन किये हुए होते हैं। यह अंतर सिर्फ इसलिए होता है कि ज्यादातर लोंगों के द्वारा उन्हीं पुस्तकों का अध्ययन बहुत कम समय किया गया, परंतु कुछ लोगों के द्वारा उन्हीं पुस्तकों का अध्ययन लगातार किया गया और वे उन्हें आत्मसात कर लिये। पुस्तकें एक ही थी पर परिणाम में जमीन—आसमान का अंतर था। यही स्थिति आप व्यापार एवं कृषि कार्य करने में लगे लोगों में भी देख सकते हैं। जो व्यापारी या कृषक अपने आप को समय के साथ अद्यतन करते रहते हैं, दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करते हैं। और जो ज्ञान हासिल करने में पीछे रहते हैं, वे प्राय: हर चीज में पीछे रहते हैं। यही बात जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देखने को मिलती है। सिर्फ स्कूल कॉलेज में पढ़कर डिग्री हासिल कर हम जीवन को सफल नहीं बना सकते हैं। हाँ, इससे कामचलाउ जीवन तो व्यतीत कर सकते हैं पर कामयाब जीवन व्यतीत नहीं कर सकते हैं। इससे हम एक उदाहरण के साथ समझते हैं। मान लिजिये हम घर बनाते हैं। तो क्या अगर हम सिर्फ नींव, दीवार और छत मजबूत बना देगें तो घर सुंदर होगा। नहीं बिल्कुल नहीं। इसके दिवारों पर प्लास्टर और रंग—रोगन, फर्शों पर मार्बल भी लगाना होगा । साथ ही बिजली—पानी के साथ अन्य सारी सुबिधाएं एवं सजावटी समानों का भी इंतजाम करना होगा ताकि घर सुंदर दिखे। और यह काम घर में लगातार यानि एक समयांतराल पर करवाते रहना होगा। ऐसा नहीं कि एक बार हम दिवारों पर अच्छा रंग—रोगन कर दिये तो यह जीवनभर चलेगा। हाँ, जो आधारभूत संरचनाएं यानि नींव, दीवार और छत हैं उसमें वर्षों तक मरम्मत की आवश्यकताएं नहीं पड़े। अकादमिक शिक्षाएं यानि स्कूल—कॉलेजों में की गई पढ़ाई भी घर की आधारभूत संरचनाएं जैसी ही है। इसकी मरम्मत करने की आवश्यकताएं शायद ही किसी को पड़ती हो। पर रंग—रोगन की आवश्यकताएं यानि इसे निखारने की आवश्यकताएं तो हमेशा बनी रहती है ताकि हमारा जीवन सुंदर और सफल हो। इसीलिए हमें अच्छे साहित्य एवं उपयोगी साहित्य की अध्ययन करते रहना चाहिए।

जिस प्रकार हमलोग तन यानि शरीर की गंदगी को साफ करने के लिए प्रतिदिन स्नान करते हैं, उसी प्रकार मन को साफ करने के लिए भी प्रतिदिन अच्छे साहित्य की अघ्ययन करने की आवश्यकता है, अन्यथा दिमाग में जंग लग जायेगा और मन में बुरे विचारों का वास हो जायेगा। तो आईये व्यक्तिगत, पारिवारिक और राष्ट्रीय प्रगति के लिए प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा का समय अच्छे साहित्य की अध्ययन में लगायें।

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