सीख किसी से भी ले लेना चाहिए। चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य किसी भी पात्र से सीखने का पक्ष लेते हुए कहते हैं कि शेर से एक, बगुले से दो, गधे से तीन,  मुर्गे से चार, कौए से पांच तथा कुत्ते से छ: बातें सीखने चाहिए। आचार्य चाणक्य ने बताया है कि सीखने को तो किसी से भी मनुष्य कुछ भी सीख सकता है। जहाँ से भी कोई अच्छी बात मिले, सीखने में संकोच नहीं करना चाहिए। यदि नीच व्यक्ति के पास भी कोई गुण है तो उसे भी सीखने के भरपूर प्रयास करना चाहिए।

शेर से

शेर से एक गुण सीखने के बारे में आचार्य चाणक्य का कहना है कि काम चाहे छोटा हो या बड़ा उसे अपनी पूरी शक्ति लगाकर करना चाहिए। यह गुण हमें शेर से सीखना चाहिए। इसका भाव यह है कि शेर जो भी काम करता है, उसमें अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। अत: मनुष्य को भी जो भी काम करना हो उसमें अपनी पूरी शक्ति लगा देना चाहिए।

बगुले से

बगुले से दो गुण धैर्य एवं एकाग्रता सीखने के बारे में आचार्य चाणक्य का कहना है कि बगुले के समान इन्द्रियों को वश मे करके देश, काल एवं बल को जानकर मनुष्य को अपना कार्य करना चाहिए। तभी वह सफल हो सकता है। भाव यह है कि बगुला सब कुछ भूलकर एकटक मछली को ही देखता रहता है और मौका लगते ही उसे झपट लेता है।मनुष्य को भी काम करते समय अन्य सब बातों को भूलकर केवल देश, काल और बल का विचार करना चाहिए।

देश का मतलब समझाते हुए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी स्थान पर किसी काम को करने से क्या लाभ होगा? वहां पर उस वस्तु की कितनी मांग है? इत्यादि पर विचार करना ही देश—स्थान पर विचार करना है।  कौन—सा समय किस काम के लिए अनुकूल होगा? इसपर विचार करना काल पर विचार करना है एवं मेरी शक्ति कितनी है, मेरे पास कितना धन या साधन हैं? इस पर विचार करना ही बल पर विचार करना है। कोई भी काम आरंभ करने के पहले इन सब बातों पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए।

गधे से

आचार्य चाणक्य का कहना है कि श्रेष्ठ एवं विद्वान व्यक्तियों को गधे से तीन गुण सीखना चाहिए।

एक: जिस प्रकार गधा अत्यधिक थका होने पर भी बोझ ढोता रहता है, उसी प्रकार व्यक्ति को भी आलस्य नहीं करके अपने लक्ष्य प्राप्ति एवं सफलता के लिए हमेशा प्रयत्न करते रहना चाहिए।

दो: जिस प्रकार गधा अपने कर्तव्यपथ से कभी विमुख नहीं होता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी कर्तव्यपथ से कभी विमुख नहीं होना चाहिए।

तीन: जिस प्रकार गधा संतुष्ट होकर जहां—तहां चर लेता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को सदा संतोष रखकर फल की चिंता किए बिना, कार्य करते रहना चाहिए।

मुर्गे से

आचार्य चाणक्य मुर्गे से यह चार बातें सीखने की सलाह दिये हैं— समय पर जागना, लड़ना, भाइयों को भगा देना और उनका हिस्सा स्वयं झपटकर खा जाना। मुर्गे से यही चार बातें सीखनी चाहिए और व्यक्ति के जीवन में इनका महत्व मानवीय दृष्टि से मूल्यवान है।

कौए से

आचार्य चाणक्य कौए से पांच बातें सीखने की सलाह देते हैं।

एक: छिपकर मैथुन करना— अर्थात नितांत व्यक्तिगत कार्य हमेशा छिपकर करना चाहिए।

दो: समय—समय पर धन संग्रह करना— जिस प्रकर कौआ छोटी—छोटी चीजों को अपने घोंसले में एक़त्रित करते रहता है ताकि समय आने पर दूसरों का मुंह न ताकना पड़े, उसी प्रकार मनुष्य को भी धन संग्रह करते रहना चाहिए।

तीन: सावधान रहना— जिस प्रकार कौआ हमेशा चौकन्ना रहता है उसी प्रकार मनुष्य को भी हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए।

चार: आवाज देकर औरों को इकट्ठा करना— जिस प्रकार कौआ विपत्ति के समय कांव—कांव करके अपने भाईयों को बुला लेता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी विपत्ति के समय अपने सगे—संबंधियों को बुला लेना चाहिए।

पांच: किसी पर विश्वास नहीं करना— जिस प्रकार कौआ कभी भी किसी पर विश्वास नहीं करता और हर काम जांच—परखकर करता है, उसी प्रकार मनुष्य को हर काम जांच परखकर करना चाहिए। इससे ठगे जाने की संभावना नहीं रहती है।

कुत्ते से

आचार्य चाणक्य कुत्ते से इन छ: गुणों को सीखने की सलाह देते हैं—

एक: संतोष— कुत्ता कितना ही भुखा क्यों न हो, उसे जितना भी मिल जाए, उसी से संतोष कर लेता है। उसी प्रकार मनुष्य को भी समय पर जो भी खाने को मिल जाए, खा लेना चाहिए। नखरे नहीं करना चाहिए।

दो: सतर्कता— जिस प्रकार कुत्ता थोड़ी सी आहट पाते ही गहरी नींद से जाग जाता है, उसी प्रकार मनुष्य का भी नींद होना चाहिए। इससे मनुष्य सुरक्षित रहता है, शत्रुओं का भय नहीं रहता है।

तीन: सुनिद्रा— जिस प्रकार कुत्ता को थोड़ी ही देर में गहरी निंद आ जाती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी सोने का अभ्यास करना चाहिए।

चार: लघुचेतन— हमें हल्की नींद लेना चाहिए, और सोते समय भी होश में होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर तुरंत नींद से जाग जाना चाहिए।

पांच: स्वामिभक्ति— जिस प्रकार कुत्ता अपने स्वामी यानि मालिक का वफादार होता है और उनके लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देता है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी स्वामिभक्त होना चाहिए।

छह: वीरता—कुत्ता एक बहादुर जानवर होता है। समय आने पर वह किसी से लड़ने से डरता नहीं है। मनुष्य को भी सदैव निडर रहना चाहिए।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s