The Science of Getting Rich: Book Summary in Hindi

The Science of Getting Rich, Wallance Delois Wattles के द्वारा 1910 ई0 में लिखी गई एक ऐतिहासिक पुस्तक है, जो लाखों—करोड़ों की जिंदगी बदल चुकी है।  सौ से अधिक वर्षों के बीत जाने के बाद भी इस पुस्तक का महत्व कम नहीं हुआ है। लेखक का जन्म अमेरिका में हुआ था और अपने शुरूआती दिनों में उन्हें भारी तनाव, गरीबी एवं विफलताओं के दौर से गुजरना पड़ा था। अंतत: उन्होंने अपना जीवन बदलने का फैसला किया।  उन्हीं के शब्दों में, यदि आप अमीर, कामयाब एवं स्वस्थ बनने का निर्णय नहीं लेते हैं तो समझिए कि अनजाने में आपने गरीब, नाकामयाब एवं रोगी बनने का फैसला कर लिया है।  लेखक के अनुसार यह पुस्तक हर उस स्त्री अथवा पुरूष को धनवान बनाने के लिए लिखी गई है, जो इस पर भरोषा एवं अमल करेगें।  इस पुस्तक में कुल सतरह अघ्याय हैं।

पहला अध्याय

The Right to be Rich (अमीर बनने का अधिकार)

धन के बिना मनुष्य का पूर्ण एवं सफल जीवन जीना कठिन ही नहीं असंभव भी है।  लगातार विकास ही हमारे जीवन का एकमात्र उद्देश्य है एवं धन के बिना मनुष्य का मानसिक, शारीरिक एवं आत्मिक विकास असंभव है।  अत: आज के इस अर्थयुग में धनी बनने के विज्ञान को जानना बेहद जरूरी है।

कम में संतोष कर लेने से बड़ा पाप इस संसार में नहीं है। जब आप बड़ी सफलता पाने की योग्यता रखते हों तो कम में संतोष क्यों किया जाए।  प्रकृति भी उन्नति, प्रसार तथा विकास को पसंद करती है।

धनी बनने की कामना, हमारे जीवन के तीन अंग तन, मन और आत्मा के विकास के लिए बेहद जरूरी है।  शरीर के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के साथ—साथ कठोर परिश्रम से मुक्ति, मन के लिए अच्छे साहित्य एवं अन्य मनोरंजन के साधन एवं आत्मा के लिए प्रेम अतिआवश्यक है।  और गरीबी में इन तीनों यानि तन, मन और आत्मा की संतुष्टि नहीं हो सकती।  इसलिए धनी बनना हमारा प्रथम कर्तव्य है।

पहले तो आपके अंदर अमीर बनने की कामना होनी चाहिए फिर ध्यानपूर्वक इसकी पूर्ति के लिए सहयोगी विज्ञान का अध्ययन करना चाहिए।

अध्याय दो

There is a Science of getting rich (अमीरी का विज्ञान है)

लेखक का कहना है कि गणित एवं भौतिकी की तरह ही अमीरी का भी नियम है।  कोई भी इन्हें सीखकर एवं पालनकर अमीर बन सकता है।  एक निश्चित कार्य प्रणाली के साथ लगातार प्रयास करने से धन की प्राप्ति होती है, जो लोग जाने अनजाने में इस कार्य प्रणाली का पालन करते हैं वे अमीर बन जाते हैं अबकि बाकी लोग कठिन परिश्रम करने के बाद भी गरीब रह जाते हैं।

अमीर बनना किसी विशेष वातावरण या पेशे का परिणाम नहीं होता है।  यहाँ तक कि अमीरी का संबंध बुद्धिमानी, विशेष योग्यता, प्रतिभा से भी नहीं है।  अक्सर दुनियाँ में बड़े—बड़े प्रतिभावान व्यक्ति कम प्रतिभा वाले के यहाँ नौकरी करते हैं।  अमीरी कंजूसी से धन संग्रह करने का भी परिणाम नहीं है।  अमीर बनने के लिए एक निर्धारित कार्यप्रणाली पर निरंतर प्रयास करना बहुत जरूरी है।

दुनियाभर में अमीरों की संख्या कम और गरीबों की संख्या ज्यादा को देखते हुए सवाल किया जा सकता है कि अमीर बनने का मार्ग कहीं कठिन तो नहीं है? बिल्कुल नहीं है, क्योंकि प्रकृति ने अमीर बनने के लिए आवश्यक गुण हम सभी में पहले से ही डाले हैं, तभी तो बुद्धिमान, प्रतिभावान, मूर्ख, स्वस्थ, अस्वस्थ, बलवान तथा कमजोर सभी प्रकार के लोग अमीर बन चुके हैं। यदि आपके शहर के एक आदमी अमीर बन सकते हैं तो आप भी अमीर बन सकते हैं।

जिस काम में आपकी रूचि है अगर आप उसी काम में हाथ डालेंगे तभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पायेगें।  यदि समान व्यापार में आपका पड़ोसी आपसे अधिक कामयाब है तो इसका सीधा अर्थ है कि आप दोनों के कार्यप्रणाली में अंतर है।  यदि आप धनी बनना चाहते हैं तो आपको अपने पड़ोसी के कार्यप्रणाली को अपनाना होगा।

अध्याय तीन

Is opportunity monopolised ? (क्या अवसर पर एकाधिकार है?)

धन पर किसी व्यक्ति विशेष का एकाधिकार नहीं है।  प्रकृति किसी को भी अवसर का लाभ उठाने से नहीं रोकती है। राजा हो या रंक, अमीर हो या गरीब, नौकर हो या मालिक प्रकृति सभी को समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर देती है।  नौकरों को उनके मालिकों द्वारा दबाकर या फिर बड़े व्यापार के माध्यम से कुचलकर गरीब नहीं बनाया जाता है बल्कि उन लोगों की कार्यप्रणाली, सोच तथा नजरिया अमीरी के विज्ञान के विरोधी होते हैं।

आपूर्तिै के अभाव में यहाँ किसी को निर्धन नहीं रखा गया है, प्रकृति के गर्भ  में छिपी आपकी आवश्यकता से कहीं अधिक संपदा आपको आपूर्ति के लिए तैयार है।

प्रत्येक वस्तु की रचना जिस मूल तत्व से हुआ है, विचार उस मूल तत्व का एक अंश मात्र है।  अत: मूलतत्व भी सोचने समझने की क्षमता रखता है।  मूल तत्व जीवन को प्रचुरता यानि अधिकता की ओर प्रेरित करते हुए लगातार कार्य करता है।

अध्याय चार

The First Principle in the Science of getting rich (अमीरी के विज्ञान के प्रथम नियम)

अनाकार तत्व से भौतिक वस्तुओं का निर्माण विचार का ही कार्य है।  हम विचारों के संसार में जीते हैं जो विचारतत्व का एक अंशमात्र है।  प्रत्येक निर्माण के विचार की तरंगों को विचार तत्व द्वारा ठोस आकार प्रदान किया जाता है, परंतु इसके लिए निर्माण से संबंधित पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का पालन करना अनिवार्य होता है।

जो भी विचार आपके मस्तिष्क में जन्म लेता है, संसार में उसका अस्तित्व दृश्य अथवा अदृश्य रूप में कहीं न कहीं अवश्य होता है, जिसे अमीरी के विज्ञान का पालन करके आसानी से पाया जा सकता है।

हमारा मस्तिष्क विचारों का केन्द्र है जहाँ विचारों का जन्म होता है।  हम जो कुछ भी बनाते हैं, उसका निर्माण सर्वप्रथम मस्तिष्क में ही होता है।  बिना सोच—विचार के किसी प्रकार के निर्माण संभव नहीं है।

अभी तक हमारे सभी प्रयास शारीरिक श्रम द्वारा ही किया जाता है।  कोई भी निर्माण, रूपांतरण अथवा परिवर्तन के द्वारा ही किया जा रहा है।  विचारों के द्वारा अनाकार तत्व से निर्माण के बारे में अभी तक सोचा भी नहीं गया है।  हम अभी अपने विचारों की पूर्ति के लिए प्रकृति के साधनों पर ही निर्भर हैं।  मनुष्य द्वारा ईश्वर की भांति निर्माण करने के विषय में अभी तक विचार तक नहीं किया गया है।

शारीरिक श्रम के बिना नव निर्माण के विषय में सोचने के लिए निम्न मौलिक तथ्यों पर विश्वास करना आवश्यक है—

  1. सभी चीजों का निर्माण विचार तत्व से हुआ है, यही वह मूल पदार्थ है जो दृश्य—अदृश्य रूप में भिन्न—भिन्न आकार—प्रकार में सब जगह मौजूद है।
  2. इस तत्व के अंदर जन्में विचार के अनुरूप ही वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।
  3. मानव मस्तिष्क मनचाहे विचारों को जन्म देकर अनाकार तत्व की सहायता से उन्हें साकार करने की क्षमता रखता है।

अपने मनपसंद कार्यों को करने से आप वह सोचना आरंभ कर देते हैं जिसे सोचना आपको अच्छा लगता है, यही अमीरी का पहला नियम है। हम वह सभी कुछ सोच सकते हैं, जो हम सोचना चाहते हैं।  मनुष्य के लिए ईश्वर का यह सबसे बड़ा वरदान है।

परंतु अदृश्य (भविष्य) के विषय में सोचना दृश्य (वर्तमान) के विषय में सोचने से ज्यादा कठिन है। क्योंकि जो दिखाई देता है उससे सहमत हो जाना बहुत ही आसान है।  जबकि अदृश्य के विषय में सोचना, उसकी योजना बनाना थोड़ा मुश्किल काम है।  इसलिए अधिकांश लोग इससे दूर भागते हैं।  जो सामने दिखई देता है उसे स्वीकार करना आसान है, अत: हम जो कुछ भी देखते हैं, वही हमारी सोच बन जाती है।  इसके विपरीत अपनी सोच को तैयार करना फिर उसे साकार रूप देना कठिन एवं ईमानदारी से भरा कार्य है।

आप जिसे पाना चाहते हैं केवल उसके बारे में सोचिये या देखिये, जिसे आप नहीं चाहते हैं उसके बारे में मत सोचिये। ऐसी धर्म सभाओं में जाने से बचें जहाँ अधिकतर यह सिखाया जाता है कि धन—दौलत सभी बुराइयों एवं विपत्तियों की जड़ है।  लक्ष्य के विपरीत दिशा मे ले जाने वाली पुस्तकों, पत्र—पत्रिकाओं से दूर रहें।

उपर कहे गये तीन तथ्यों पर पूर्ण विश्वास करें एवं बिना तर्क—वितर्क एवं बहस के इसका पालन करें, एवं इन्हें अपनी आदत में शामिल कर लें।

अध्याय पाँच

Increasing Life (जीवन विस्तार)

विस्तार जीवन का लक्षण है।  प्रत्येक जीवित पदार्थ अपने लिए निरंतर विस्तार खोजता है।  जीवन के विकास हेतु विस्तार सदैव जारी रहेगा तथा रहना भी चाहिए।  हमारा मस्तिष्क भी विस्तार पसंद करता है।  प्रत्येक विचार एक नये विचार को जन्म देता है।  प्रकृति से अधिक की कामना करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।  आप अमीर बने ईश्वर भी यही चाहता है।  आपके माध्यम से सर्वश्रेष्ठ को प्रदर्शित करना उसका उद्देश्य है।  आपमें जीते हुए अनंत संभावनाओं तथा जीवन की पूर्णता को वह सिद्ध करना चाहता है।  इस महान कार्य में आप भी ईश्वर का सहयोग कर सकते हैं।

प्रकृति की अभिलाषा है आप भी वह सब कुछ पाए्ं जो आप पाना चाहते हैं।  कुदरती तौर पर सभी कुछ आप ही का है, सर्वप्रथम इस सच्चाई को स्वीकार करें।  आपका उद्देश्य मात्र स्वार्थ से प्रेरित न होकर बहुजन हिताय—बहुजन सुखाय के भाव से प्रेरित होना चाहिए।  आपका लक्ष्य भौतिक , मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तर पर संतुलन बनाए रखते हुए जीवन निर्वाह करने का होना चाहिए।  जीने का यही तरीका सही है।  कुदरती तौर पर हम सभी इस कला में माहिर होते हैं।  अभावग्रस्त, अपमानजनक एवं तुच्छ जीवन जीना पशु की तरह जीने के समान है।

याद रखें, अत्यधिक स्वार्थ तथा समर्पण भाव दोनों ही सफलता के मार्ग की प्रमुख बाधाएँ हैं।  ईश्वर आपका बलिदान चाहता है, ऐसी दकियानुसी बातों पर भरोसा न करें।  ईश्वर आपसे आपका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन चाहता है, जिसके माध्यम से आप सही मायने में अन्य लोगों को भी मदद कर सकते हैं। अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए आपको अमीर बनना होगा।

छीना झपटी, ईर्ष्या तथा प्रतिस्पर्द्धा से दूर रहें।  अत्यधिक मौलभाव अथवा बहस न करें।  निजि स्वार्थ के लिए किसी को धोखा न दें।  योग्यता से कम मूल्य में न तो किसी के लिए काम करें न ही किसी से काम लें।  किसी अन्य की संपत्ति को ललचाई नजरों से न देखें।

जहाँ तक संभव हो लाचार प्रवृति से दूर रहें।  ईश्वर ने किसी व्यक्ति विशेष को अधिक योग्यता दी है, ऐसा नहीं है ।  हम सभी में समान क्षमताएँ है।  आपको निर्माता बनना चाहिए न कि प्रतियोगी फिर आपको वह सब कुछ मिलेगा जो आप पाना चाहते हैं, तथा प्राप्त करने के इस क्रम में आपसे जुड़े सभी लोगों को इसका लाभांश दिया जायेगा।  आपकी अमीरी के लिए आवश्यक संपत्ति को पैदा करने के लिए समस्त शक्तियां तैयार है।  परंतु सवाल यह है कि क्या आप तैयार है?  प्रत्यक्ष के मुकाबले परोक्ष पर अधिक ध्यान दें, क्योंकि भले ही कोई आपके प्रत्यक्ष को कब्जा लें, वह आपके हिस्से का परोक्ष नहीं हथिया सकता।

अध्याय छ:

How Riches Come to You (लक्ष्मी आपके द्वार)

ग्राहक को उसके द्वारा दी गई कीमत से अधिक मूल्य की वस्तु भी नहीं दी जा सकती, किन्तु उसे उसके लिए अधिक उपयोगी एवं उच्च गुणवत्ता की वस्तु दी जा सकती है।

प्रतिस्पर्द्धा छोड़कर जब आप निर्माण पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हैं तो लोगों की मदद करना आपके लिए अधिक सरल हो जाता है।  तब आप किसी अन्य से मुकाबला करना छोड़ स्वयं के साथ मुकाबला करना आरंभ कर देते हैं, यह तरीका सबसे अधिक सरल है। दृढ़ इच्छा शक्ति के माध्यम से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है।  बशर्ते कि आपकी कामना के पीछे उन्य लोगों का लाभ भी छिपा हो।  अधिक की कामना करने में घबराने, शर्म अथवा संकोच करने की आवश्यकता नहीं है।  ईशा मसीह के अनुसार— मांगो तुम्हें दिया जायेगा, खटखटाओं द्वार तुम्हारे लिए खोला जायेगा, ढूँढों मार्ग तुम्हें दिखाया जाएगा।  परमपिता की भी यही ईच्छा है।  जीवन में प्रचुरता के लिए हमें जो कुछ भी चाहिए, उसे हम तक पहुँचाने का कार्य मूल तत्व कर ही रहा है तथा हमेशा करता रहेगा।  पैगम्बर पॉल के अनुसार — वह ईश्वर ही है जो आपके माध्यम से सपना देखता है, तथा उसे साकार भी करता है।

आशाएँ, आकांक्षाएं तथा अपेक्षाएं ईश्वर के वरदान हैं। ये ईश्वर के समान अनंत हैं, अत: इसकी पूर्ति ईश्वर ही कर सकते हैं।

फिर अधिक की अपेक्षा करने में कैसा संकोच।

अधिकतर लोग गलत धारणाओं के शिकार हैं।  अनका मानना होता है कि दरिद्रता, बलिदान एवं समझौते का जीवन जीने से भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है।  गरीबी को वे ईश्वर रचित भाग्य का खेल मानते हैं।  अधिक की कामना को लालच एवं संतोष को अपने जीवन का आधार मानते हैं।

अध्याय सात

Gratitude (कृतज्ञता)

मस्तिष्क को एक निर्धारित लक्ष्य के लिए नियंत्रित एवं संतुलित करने की प्रक्रिया को आपके कृतज्ञतापूर्ण दृष्टिकोण के माध्यम से सरल तथा संभव बनाया जा सकता है।

सर्वप्रथम आपको यह विश्वास करना होगा कि सभी प्रकार की गतिविधियों का शुभारंभ बुद्धिमान तत्व से ही होता है।  दूसरा आपकी समसत इच्छाओं की पूर्ति के लिए एकमात्र यही तत्व मूलस्रोत है।  तथा तीसरा इससे तालमेल बैठाने का एकमात्र तरीका है—कृतज्ञता।

दरिद्र यानि गरीब लोगों के पास कृतज्ञता का अभाव होता है।  वे कहते नहीं थकते कि भगवान ने उनके भाग्य में गरीबी लिखकर उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है।  ऐसा कहकर वे परमेश्वर द्वारा उनके लिए तैयार किये गये विशेष कार्यक्रम में निरंतर बाधा डालते रहते हैं।आज जितनी भी चीजें आप तक पहुँच रही है, वे सभी एक पूर्व निर्धारित मार्ग से होते हुए आपकी ओर यात्रा कर रही है।  आपकी कृतज्ञता इस यात्रा की गति को बढ़ाने के साथ—साथ आपके लिए महत्वपूर्ण चीजों के आप तक पहुंचने के और अधिक रास्ते खोल देती है।  कृतज्ञता आपके मस्तिष्क को नकारात्मक एवं घातक विचारों से भी बचाती है।

कृतज्ञता में निरंतरता के अभाव के चलते अविश्वास की भावना पैदा होती है। जिस पल मन में अविश्वास पैदा होता है, उसी पल पतन होना शुरू हो जाता है।  जब अपना ध्यान आप गरीबी, दरिद्रता तुच्छता अथवा लाचारी पर केन्द्रित करना आरंभ करते हैं तो आपका मस्तिष्क इनसे संबंधित भावनाएँ तैयार करना तथा इन्हें प्रसारित करना आरंभ कर देता है।  फलत: आप अपनी भावना से मेल खाते लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना आरंभ कर देते हैं। कृतज्ञ मस्तिष्क हमेशा सकारात्मक विचारों को जन्म देता है।  यह लाभदायक परिणामों के लिए प्रोग्राम कर दिया जाता है, इसीलिए इसे हमेशा लाभदायक परिणाम ही प्राप्त होते हैं।  कृतज्ञता से विश्वास का भी जन्म होता है।

अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको हर अच्छी बुरी चीज के लिए आभार प्रदर्शित करने की आदत डालनी होगी।

अनावश्यक या नकारात्मक विषय पर चर्चा करके व्यर्थ में अपना समय बरबाद न करें।

आज हम जहाँ पर भी हैं वहाँ तक हमें पहुंचाने के लिए ईश्वर की एक विशेष योजना लंबे समय से कार्य कर रही है।  इस योजना का खंडन करने के बजाय हमें यह मान लेना चाहिए कि ईश्वर अपनी जगह बिल्कुल सही है तथा वह हमारा भला ही चाहते हैं।

अध्याय आठ

Thinking in the certain way (सोच निर्धारित दिशा में)

मनचाहे को प्राप्त करने के लिए पहले आपको अपना मस्तिष्क इसके लिए प्रोग्राम करना होता है, तभी आपका मस्तिष्क इससे संबंधित तरंगों का प्रेषण करने में कामयाब हो पाएगा। अनेक लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं, क्योंकि वे पहले से ही परिणामों की अपेक्षा करते हैं। अपनी इच्छाओं को लेकर वे हमेशा दुविधा की स्थिति में रहते हैं।  ऐसे में वे विचार तत्व तक अपनी बात पहुँचाने में असफल हो जाते हैं, तथा जाने—अंजाने मे अपने सपने से हाथ धो बैठते हैं।

जब आप अविश्वास एवं शंका के साथ अपने विचार पर कार्य करना आरंभ करते हैं तो अपनी विफलता को आप पहले ही सुनिश्चित कर चुके होते हैं। हमेशा बड़ा सोचें।  आप अपने भविष्य को वर्तमान की भांति अनुभव करना आरंभ कर दें।  अपने लक्ष्य पर नजर जमाएँ रहें और फुरसत के क्षणों में अपने विचार को निरंतर पोषण देते रहें।  आपका रोम—रोम लक्ष्यप्राप्ति के लिए उत्साहित एवं आनंदित रहना चाहिए।  ऐसे में आपका मस्तिष्क कम्पन्न करना शुरू कर देता है।  इसमें विशेष प्रकार की तरंगें उत्सर्जित होनी शुरू हो जाती है।

अलाउद्दीन की तरह सभी  कुछ आपके हाथ में है। बस आपको स्वयं को शेखचिल्ली बनने से बचाना होगा।  अपने सपने को साकार करना आपका प्रथम उद्देश्य होना चाहिए, साथ ही आपको यह विश्वास भी होना चाहिए कि आप उसे साकार कर सकते हैं।

अध्याय नौ

How to use the will (इच्छाशक्ति का सदुपयोग)

इच्छाशक्ति आपको अमीर बनने में भरपूर मदद कर सकती है।  अपनी इच्छाशक्ति का उपयोग खुद के लिए ही करें दूसरे के लिए नहीं चाहे उसमें उसकी भलाई ही क्यों न हो।

अपनी इच्छाशक्ति को सुनिश्चित दिशा में सोचने तथा मनवांछित फल प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करें ।  एक समय में अपने विचारों को दसों दिशाओं में फैलाने का प्रयास नहीं करें।  आपका विश्वास एवं उद्देश्य जितना अधिक गहरा होगा आप उतनी ही तेजी से कामयाबी हासिल करेंगें।

यदि आप अमीर बनना चाहते हैं तो जरूरी नहीं है कि इसके लिए गरीबी का अध्ययन किया जाए।

विपरीत दिशा में कोई काम करके हम सपनों को साकार नहीं कर सकते हैं। बीमारियों का अध्ययन करके हम आरोग्य को खोजने का प्रयास करते हैं, पाप का अध्ययन करके हम पुण्य सीखने का प्रयास करते हैं।  निर्धनता का अध्ययन करके हम अमीर कैसे बन सकते हैं? भूलकर भी गरीबी का गहराई से अध्ययन करने का प्रयास नहीं करें।  दान—धर्म के कार्यो अथवा निर्धनता के समूल नाश की बातें करने वाली संस्थाओं के चक्कर में व्यर्थ का अपना समय बरबाद मत करें।

अमीर बनने का प्रयास करके ही आप निर्धनता से लड़ सकते हैं।  गरीबों को किसी की सांत्वना, कृपा, दया अथवा भिक्षा की नहीं बल्कि प्रेरणा की गरीबों को आवश्यकता है।  यदि आप वास्तव में गरीबों की मदद करना चाहते हैं तो पहले आप स्वयं अमीर बनें, फिर अमीर बनने में गरीबों की मदद करें।

अध्याय दस

Further use of the will (सफलता का बीज)

अपने सपने का विरोध करते हुए अथवा विपरीत दिशा में कार्य करते हुए, उसके साकार होने की आशा करना बेकार है। बीते हुए कल की परेशानियों या संघर्षों के बारे में अधिक मत सोचें।  अपने पूर्वजों की कमजोर आर्थिक स्थिति अथवा कठिनाईयों की बार—बार चर्चा नहीं करें।  ऐसा करने से आपके मस्तिष्क हीन भावनाओं से ग्रसित होना शुरू हो जायेगा।  परिणामस्वरूप यह आपके सकारात्मक विचारों की गति को धीमा कर देता है।  अच्छी बातों को सीखने में समय लगाएँ।  निराशाजनक सूचनाएँ देने वाले लोगों या पत्र—पत्रिकाओं से दूर रहें।

ईश्वर ने सफलता का बीज आपके मस्तिष्क में डाला है, दिन—रात सकारात्मक विचारों से उसे पोषित करें, नकारात्मक से उसकी रक्षा करें, उसके लिए वातावरण तैयार करें ताकि वह उचित दिशा में सही प्रकार से वृद्धि कर सके।

सफलता के शिखर पर पहुँचना मानव जीवन का महानतम लक्ष्य है।  प्रतियोगिता के मार्ग् से होते हुए अमीर बनने का प्रयास करना प्रकृति के नियमों के खिलाफ है पर यही कार्य जब रचनात्मक विचारों के साथ किया जाए तो सभी कुछ बदल जाता है।  बस आपको अपने सपने पर डटे रहना है।

अध्याय ग्यारह

Acting in the certain way (प्रयास सही दिशा में)

विचार प्रेरणा शक्ति है जो रचनात्मक उर्जा को प्रयोग में लाकर हमारे लिए वांछित परिणाम पैदा करते हैं। अपने सपने के बारे में विचार करके स्वयं को मात्र उत्साहित किया जा सकता है परंतु केवल इससे काम नहीं बनेगा, इसे साकार करने के लिए यदि जरूरी प्रयास नहीं किए जाएं तो आपका सपना मर सकता है।

अभी तक मनुष्य इतनी तरक्की नहीं की है कि सिर्फ सोचकर ही चीजों का निर्माण कर सकें। अत: मनचाहा प्राप्त करने के लिए विचारों को हमारे प्रयासों की भी आवश्यकता होती है।  अपने विचार पर सही ढंग से काम करें तभी आप अपने सपने को साकार करने में सफल हो पायेगें।

सपरा साकार होने पर चीजें आप तक स्वयं चलकर पहुँचती है, परंतु उन्हें ग्रहण करने की योग्यता आपमें काम करने के बाद ही आ पाएगी।  अन्यथा चीजें आपकी आँखों के सामने से होकर गुजर जाएंगी और आप बस हाथ मलते हुए ही उन्हें देख सकते हैं।

आपको तुरंत प्रयास करने चाहिए।  आप उचित व्यवसाय अथवा वातावरण में नहीं हैं, ऐसा सोचकर अपने प्रयासों को स्थगित नहीं करें।

वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।

बीते हुए कल पर नाराज होकर अपना समय नष्ट न करें।

आने वाले कल के बारे में अत्यधिक सोचकर व्यर्थ में अपना समय न गंवाएं।

सभी कुछ मायावी अथवा रहस्यमय तरीके से हो जायेगा ऐसी भी उम्मीद नहीं करें।

समय अथवा वातावरण के बदलने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि अपने प्रयासों से इन्हें मनचाहा रूप प्रदान करें।

अभी तक हमने सीखा:

  1. सभी चीजों का निर्माण विचार तत्व से हुआ है, यही वह मूल पदार्थ है जो दृश्य—अदृश्य रूप में भिन्न—भिन्न आकार प्रकार में सर्वत्र व्याप्त है।
  2. इस तत्व के अंदर जन्में विचारों के अनुरूप ही वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।
  3. मानव मस्तिष्क मनचाहे विचारों को जन्म देकर अनाकार तत्व की सहायता से उन्हें साकार रूप प्रदान करने की असीमित क्षमता रखता है।

4.प्रतियोगिता का रास्ता छोड़कर हमें रचनात्मकता का मार्ग अपनाना चाहिए।  हमें अपने मस्तिष्क में एक निजि सपने का निर्माण करना है तथा अपने उद्देश्य एवं विश्वास की गहराई को बढ़ाते हुए सकारात्मक विचारों के माध्यम से निरंतर इसे पोषित करना है। मनचाही सफलता पाने तक नकारात्मक विचारों से दूर रहें क्योंकि यह आपके विश्वास में कमी करके आपके सपने की हत्या कर सकता है।

  1. मनचाहा प्राप्त करने के लिए वर्तमान वातावरण में रहते हुए ही हमें प्रयास करने होगें। कुछ ही समय बाद सभी कुछ हमारी सोच के अनुरूप स्वत: बदलना आरंभ हो जाता है।

अध्याय बारह

Efficient Action (कुशल प्रयास)

आप उन्नति तभी करेंगे जब आप वर्तमान से अधिक की कामना करते हुए उसे पाने के लिए और अधिक प्रयास करेगें, क्योंकि प्रयासों में कमी के चलते आपका अधिक की कामना करना पूर्णत: व्यर्थ साबित हो सकता है।  संपूर्ण विश्व आज उन्हीं लोगों के प्रयासों के चलते तरक्की कर रहा है जो अधिक की अपेक्षा रखते हैं।

जितना संभव हो सके उतना अधिक कार्य आज ही पूरा करने की आदत डालें।  जो लोग आज के कामों को कल पर टालते चले जाते हैं, वे साथ—साथ अपनी विफलता को भी सुनिश्चित करते चले जाते हैं।

लगन, अगन और मगन होकर प्रयास करने पर अनेक शक्तियाँ आपको कामयाबी दिलाने की दिशा में सर्किय हो उठती है।  हो सकता है आपके प्रयास के अनुरूप परिणाम न प्राप्त हो, पर यह जानकर छोटे प्रयासों को नजर अंदाज नहीं करें।  छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रयासों का महत्व है।  महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने कितना अधिक काम किया बल्कि महत्वपूर्ण तो यह है कि कितना अधिक कार्य आपने कुशलता के साथ किया।  कुछ ही कामों को कुशलता से करने पर विफलता के सिवा कुछ अन्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है।  इसके विपरीत कुशलता से किए गए काम आपको सफलता दिलाते हैं अत: पूरी जिंदगी कुशलतापूर्वक कार्य करके आप मनचाही सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

अधिकांश लोग मानसिक एवं शारीरिक शक्तियों के बीच सही तालमेल स्थापित करने में विफल हो जाते हैं, वे सोचते कुछ हैं तथा करते कुछ और।  सही गलत आप जो कुछ भी सोचते और करते हैं, उसमें बहुत सही शक्ति का हास होता है, अत: क्यों न सही दिशा में प्रयास करके शक्ति का सदुपयोग किया जाए।  परिणामस्वरूप शत—प्रतिशत सफलता आपकी मुठ्ठी में होगी।  एक बार आपको मिली सफलता आपके लिए सफलता के अनेकों अन्य द्वार खोल देती है।

अध्याय तेरह

Getting into Right Business ( सही काम की तलाश)

किसी भी काम को सफलतापूर्वक निबटाने के लिए आपकी लगन के साथ—साथ उस काम को करने में आपकी दक्षता की विशेष आवश्यकता होती है।  अक्सर बिना निपुणता के कार्य को पूरा तक कर पाना असंभव हो जाता है।  आपकी निपुणता आपको संबंधित कार्य सफलतापूर्वक समाप्त करने की योग्यता तो दिलाती है, परंतु यह जरूरी नहीं है कि इसके माध्यम से आप अमीर भी बन जायेगें।  दुनिया हजारो—लाखों ऐसे लोगों से भरी पड़ी है, जो अपने काम मेें पूरी तरह से माहिर हैं, परंतु अमीर नहीं हैं।  ऐसा नहीं है कि किसी कार्य को करने में दक्ष होना बुरी बात है, परंतु अपनी दक्षता का इस्तेमाल सही दिशा में करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

आपका मस्तिष्क परमेश्वर की ओर से आपको दिया गया सर्वश्रेष्ठ औजार है जिसके सही इस्तेमाल से आप उस व्यवसाय अथवा काम—धंधे में जल्दी ही अमीर बन सकते हैं, जिसे करना आपको अच्छा लगता है।  उस व्यापार में आपकीर कामयाबी लगभग सुनिश्चित हो जाती है, जिसके विकास में आप अपना तन, मन तथा समस्त योग्यताएं एवं क्षमताएं आरोपित कर देते हैं। आप किसी भी व्यापार में कामयाब हो सकते हैं, जरूरी नहीं हैं कि आप उसे करने में माहिर हो।  आप उसमें अगर बिल्कुल नए भी हो तब भी उसे सीखकर उसमें कामयाब बना जा सकता है।  परंतु अपनी रूचि के व्यापार में जाकर कामयाब होना अपेक्षाकृत अधिक सरल होता है।

मनपसंद कार्यो को करना ही जीवन का दूसरा नाम है।  इच्छाएं शक्ति की परिचायक होती हैं।  अपना प्रत्येक कार्य निपुणता के साथ पूरा करें।  अनावश्यक विलम्ब एवं शीघ्रता दोनों ही आपके लिए घातक है।

अध्याय चौदह

The Impression of Increase (प्रचुरता की अभिलाषा)

प्रकृति भी प्रचुरता पसंद करती है।  ईश्वर का संदेश भी प्रचुरता के ही संबंध में हैं।  इस पृथ्वी पर जीवित प्रत्येक वस्तु की एक ही अभिलाषा है, वह है प्रचुरता।  इसमें रूकावट का अर्थ है मृत्यु।

ईसा मसीह के अनुसार— उन्हें और दिया जाएगा जिन्हें और अधिक चाहिए परंतु संतुष्टों से वापस ले लिया जाएगा।

अधिक धन—संपत्ति की कामना करना कतई अपराध अथवा पाप नहीं है, यह जीवन में प्रचुरता को पैदा करने का साधन मात्र है।

प्रचुरता की कामना हमारे आत्मा की आवाज है।  अपने संपर्क में आने वाले को प्रचुरता की ओर तेजी से अग्रसर होने के लिए प्रेरित करें।  महसूस करें आप सफलता पाने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं, साथ ही आप कामयाबी पाने में हजारों लोगों की मदद भी कर रहे हैं।  खुद को इतना अधिक सकरात्मक बनाएं कि आपके संपर्क में आने वालो प्रत्येक व्यक्ति स्वयं के लिए भी महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक महसूस करे।  उनसे लिए गए मूल्य के बदले उन्हें अधिक कीमती अपनी सेवा प्रदान करें।  भूलकर भी अपने स्वार्थ के लिए अन्य लोगों का इस्तेमाल न करें।  लोगों को धोखा न दें, न ही उन्हें मूर्ख बनाने का प्रयास करें।  दूसरों को अपनी उंगुली पर नचाने का प्रयास न करें, न ही किसी और के ईशारे पर नाचे।  अपने भाग्य के विधाता खुद बनें।  होड़, प्रतियोगिता, जल्दबाजी अथवा प्रतिस्पर्द्धा से दूर रहें।  जोन्स का गोल्डन रूल याद रखें— दूसरों के साथ ऐसा व्यवहार करो जैसा आपको उनसे अपने लिए चाहिए।

अध्याय पंद्रह

The Advancing Man (प्रगति पुरूष)

आपका बॉस आपके काम से खुश होकर सफलता पाने में आपकी मदद करेगा, इस आशा से भूलकर भी अमीरी के सिद्धांत का इस्तेमाल अपनी नौकरी में न करें।  याद रखें मेहनत और ईमानदारी के साथ काम करने वाला कर्मचारी अपने बॉस की सबसे बड़ी दौलत होता है।  इसीलिए उसे वहीं काम करना पड़ता है जहाँ पर उसका बॉस चाहता है न कि वहाँ जहाँ वह चाहता है।  अपनी सफलता को मन में ठान लें, फिर अपने फैसले को मजबूत करते हुए एक सुनिश्चित दिशा में निरंतर प्रयत्नशील रहें ।  अपने संपर्क में आने वाले सभी लोगों को सफलता पाने के लिए प्रोत्साहित करना आरंभ कर दें।

ऐसा कोई औद्योगिक, राजनीतिक अथवा आर्थिक परिस्थिति नहीं जो आपको आगे बढ़ने से रोक सके।  आपकी सफलता स्वयं के घटित् होने का मार्ग खोज रही है, बस आपको उसे दिशा देनी होगी।

अमीरी की दिशा में आगे बढ़ते समय राह में आने वाले अवसरों को अनदेखा न करें। अवसर एक—दूसरे से जुड़े होते हैं। क्योंकि आपस में इनके जुड़ाव अदृश्य होते हैं इसलिए इसका अंदाजा लगा पाना मुश्कित होता है कि कौन सा अवसर आपके लिए सफलता की पहली पायदान साबित होगा। संपूर्ण ब्रह्मांड में आपके लिए अवसरों का अभाव हो ऐसा असंभव है तथा ईश्वरीय नियमों के विरूद्ध भी। जब आप सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्प कर लेते हैं तो आपकी सफलता का आप तक पहुँचाने का अत्तरदायित्व ईश्वर रचित ब्रह्मांड का होता है।  आप बस अपने प्रयास जारी रखें।

अध्याय सौलह

Some cautions and concluding observation (निष्कर्ष एवं सावधानियां)

आप चाहे किसी भी देश, जाति, स्थान अथवा समाज से संबंध रखते हों, अमीरी के लिए तैयार निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़कर आप किसी भी समय अमीर बन सकते हैं।  आपका अमीर बनना आपके राष्ट्र, जाति समाज तथा स्थान के लिए न सिर्फ सम्मान का विषय होगा बल्कि यह अन्य लोगों के लिए सफलता के नये मार्ग भी खोलेगा।

भविष्य में आनेवाली संभावित विपत्तियों के बारें में आवश्यकता से अधिक सोचकर व्यर्थ में समय बरबाद न करें।  पूरा ध्यान प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों पर केन्द्रित करें।  जब आप रोजाना के काम सफलता पूर्वक निपटाने में माहिर हो जाते हैं तो भवष्य में विपत्तियों की आने की संभावना अपने—आप ही समाप्त हो जाएंगी।

उचित अथवा अनुचित जो कुछ भी घटित् हो रहा है उसे सृष्टि की निर्माण व्यवस्था में सहयोगी कार्य समझकर देखने का दृष्टिकोण स्वयं में विकसित करें, तथा कभी निराश न हो।

सुनिश्चित दिशा में कार्य करते हुए मनचाहा प्राप्त न होने की दशा में धैर्य बनाएँ रखें, कुछ समय बाद आपकी मनचाही सफलता आपके सामने होगी।  याद रखें महान अवसर आंखों से नहीं दिमाग से पहचाने जाते हैं।

अब्राहम लिंकन के शब्दों के साथ इस पुस्तक का समापन कर रहे हैं— कमजोर लोग सुरक्षा की तलाश में रहते हैं जबकि विजेता अवसरों की।

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