You can win : Book summery in Hindi

You Can Win By Shiv Khera

जीत आपकी प्रसिद्ध अंतराष्ट्रीय लेखक शिव खेड़ा द्वारा लिखित बहुचर्चित पुस्तक  YOU CAN WIN  का हिंदी अनुवाद है।  शिव खेड़ा अमेरिका में क्वालिफाइड लर्निंग सिस्टम इंक के संस्थापक हैं।  वे एक शिक्षक एवं व्यवसायिक सलाहकार, प्रेरक वक्ता एवं सफल उद्यमी हैं। लेखक के शब्दों में जीत आपकी एक गाइड बुक है जो आपको तीन चीजें बताएगी:

  1. आप क्या हासिल करना चाहते हैं ?
  2. किस तरह से उसे हासिल करना चाहते हैं ?
  3. कब तक हासिल करने का प्लान है?

इस पुस्तक में कुल आठ अध्याय हैं।

अध्याय एक

नजरिए की अहमियत (Importance of attitude)

सकारात्मक नजरिया अपनाएँ  (Building a positive attitude)

कोई गुब्बारा अपने रंग की वजह से नहीं उड़ता, बल्कि उसके अंदर भरे गैस के वजह से उपर जाता है। यही बात हमारी जिंदगी पर भी लागू होती है।  मूल्यवान वह चीज है जो हमारे अंदर है। और वह चीज जो हमें ऊपर की ओर ले जाती है वह हमारा नजरिया है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विलियम जेम्स का कहना है कि मेरी पीढ़ी की सबसे बड़ी खोज यह है कि इंसान अपने नजरिए में बदलाव लाकर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है।

जी हाँ किसी भी व्यवसाय में आदमी ही आपकी सबसे बड़ी पूँजी या सबसे बड़ा बोझ हो सकते हैं।

मशहूर फ्रेंच चिंतक ब्लेज पास्कल के पास एक आदमी आया और कहने लगा कि अगर मेरे पास आप जैसा दिमाग हो तो मैं एक बेहतर इंसान बन सकता हूँ।  तब पास्कल ने जवाब ​दिया, एक बेहतर इंसान बनो तुम्हारा दिमाग खुद—ब—खुद मेरे जैसा हो जाएगा।

जिस प्रकार मजबूत​ इमारतों के लिए मजबूत बुनियाद की जरूरत होती है, उसी प्रकार सफलता के लिए भी एक मजबूत बुनियाद की जरूरत होती है और वह बुनियाद है— आपका नजरिया।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया है कि जब कोई व्यक्ति नौकरी पाता है तो इसमें 85 प्रतिशत हिस्सेदारी उसके नजरिए की होती है और बाकी के 15 प्रतिशत में उस व्यक्ति की समार्टनेस और काम की जानकारी शामिल होती है। हैरत की बात यह है कि पढ़ाई पर होने वाली खर्च की पूरी की पूरी रकम इसी स्मार्टनेस पर खर्च की जाती है, जबकि सफलता में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 15 प्रतिशत है

पाँच सबक

  1. जब हमारा नजरिया सही हो तब हमें अहसास होता है कि हम सब हीरों की खानों पर चल रहे हैं, जो अक्सर हमारे पैरों के नीचे होते हैं। हमें इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ इसे पहचानने की।
  2. दूसरी ओर घास हमेशा हरी दिखती है।
  3. जैसे हम यह सोचते हैं कि दूसरे का स्थान हासिल करके हमें खुशी होगी, उसी तरह दूसरे भी यही सोचते हैं कि हमारा स्थान पाकर उन्हें भी खुशी मिलेगी। इसी ख्वाबी सोच को लेकर लोग अदला—बदली को तैयार रहते हैं।
  4. जो लोग मौके को पहचान नहीं पाते तो अवसर का खटखटाना उन्हें शोर लगता है।
  5. एक मौका दोबारा नहीं खटखटाता, दूसरा मौका अच्छा या बुरा हो सकता है, लेकिन वो नहीं होगा जो पहले था। इसलिए सही फैसला सही समय पर करना बहुत अहमियत रखता है।

ये तीन कारक जिन्हें हम तीन Es  कह सकते हैं, हमारे नजरिए को तय करते हैं:

  1. माहौल (Environment)
  2. अनुभव (Experience)
  3. शिक्षा (Education)

माहौल— माहौल के अंतर्गत आता है— घर, स्कूल—कॉलेज, दफ्तर, मीडिया, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, धार्मिक पृष्ठभूमि, परंपराएँ और आस्थाएँ, सामाजिक माहौल, राजनैतिक माहौल।  ये सारे माहौल मिलकर एक तहजीब (संस्कृति) बनाते हैं।  किसी भी जगह तहजीब ऊपर से नीचे आती है, नीचे से ऊपर कभी नहीं।

अनुभव— जिंदगी में लोगों से और हालात से जैसा हमारा अनुभव होता है, उसी के अनुसार हमारा व्यवहार बदलता जाता है।  अगर किसी व्यक्ति के साथ हमारा अनुभव अच्छा होता है तो उसके प्रति हमारा नजरिया भी अच्छा होता है।  इसका उलटा भी उतना ही सच है।

शिक्षा— जब ज्ञान को योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो यह बुद्धिमत्ता में बदल जाता है और कामयाबी एक तरह से पक्की हो जाती है।  शिक्षा ऐसा होना चाहिए जो हमें न केवल रोजी रोटी कमाना सिखाए, बल्कि हमें जीना भी सिखाए।

अच्छे नजरिये वाले लोग विनम्र, धैर्यवान, आत्मविश्वासी और दूसरों का ख्याल रखने वाले होते हैं।

सकारात्मक नजरिए के फायदे (Benefits of positive attitude)

  • उत्पादकता बढ़ाता है।
  • मिलजुल कर काम करने की प्रेरणा देता है।
  • मुश्किलें सुलझता है।
  • क्वालिटी को बेहतर बनाता है।
  • भाईचारे का माहौल बनाता है।
  • वफादार बनाता है।
  • मुनाफा बढ़ाता है।
  • मालिक कर्मचारी और खरीददारों के बीच अच्छे और बेहतर रिश्ते बनाने की प्रेरणा देता है।
  • तनाव कम करता है।
  • व्यक्ति को समाज में योगदान देनेवाला बनाता है और वह देश के लिए महत्वपूर्ण पूँजी बन जाता है।
  • एक अच्छी शख्सियत का निर्माण करता है।

घटिया नजरिए के नतीजे (The consequences of a negative attitude)

  • कड़ुआहट
  • नाराजगी
  • बिना मकसद की जिंदगी
  • खराब सेहत
  • खुद तथा दूसरों के लिए तनाव के रास्ते पर ले जाना।

अच्छा नजरिया बनाने के उपाय

वातावरण, शिक्षा और अनुभव के बावजूद एक समझदार इंसान के नाते हम अपने नजरिए के लिए खुद जिम्मेदार हैं। जिंदगी में कभी—न—कभी हमें जिम्मेदारी कुबुल करनी पड़ती है। हम खुद को दोषी मानने के बजाय हर व्यक्ति अैर हर चीज को दोषी ठहराते हैं। गलत नजरिए वाले लोग अपनी नाकामयाबी के लिए पूरी दुनिया अपने माँ—बाप, गुरू, जीवन साथी, अर्थव्यवस्था और सरकार को दोषी ठहराते हैं।

सही नजरिए के लिए निम्न कदम अपनाना होगा:

पहला कदम अपनी सोच बदले और अच्छाई खोजें।

Step 1: Change focus, look for the positive.

हमें किसी व्यक्ति या हालात में ​कमियों को देखने की बजाए उनकी सही चीजों और अच्छाइयों को देखने की आदत डालनी चाहिए। किसी ने एक बार एंड्रयू कारनेगी से पूछा कि आप लोगों से कैसे पेश आते हैं? तब कारनेगी ने जवाब दिया, लोगों से पेश आना सोने की खुदाई करने जैसा ही है। जब आप सोने की खुदाई के लिए जाते हैं तो आप मिट्टी की तलाश में नहीं बल्कि सोने की तलाश में जाते हैं।  प्रत्येक लोगों में खूवियाँ और खामियाँ होती है।  आप जो ढूँढ़ेंगे वही मिलेगा। याद रखें बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय देती है।

गलत नजरिए वाले लोग हमेशा नुक्स निकालते हैं। चाहे कुछ भी हो, वे हर बात में नुक्स निकालते ही हैं।  नुक्स निकालने को ही वे अपना कैरियर बना लिया है।  हर घर, परिवार या दफ्तर में ऐसे लोग मिल जायेंगे।  ये लोग प्लेग की महामारी की तरह हर तरफ मायूसी का पैगाम फैलाते हैं और ऐसा माहौल पैदा करते हैं ​जिनके परिणाम बुरे या गलत हों ऐसे निराशावादी लोगों की पहचान

  • मुसीबतों के बारे में बात न करें तो वे नाखुश होते हैं।
  • खुशी के हालात में भी ये बुरा ही महसूस करते हैं, इसी डर से कि न जाने कल क्या हो।
  • अपनी जिंदगी का अधिकांश समय वे कंप्लेन काउंटर पर ही गुजार देते हैं।
  • हमेशा बत्ती बुझाकर देखना चाहते हैं कि अंधेरा कितना है।
  • जिंदगी के आइने में दरारें ढूँढ़नें में लगे रहते हैं।
  • यह सुनने के बाद कि बिस्तर पर ही ज्यादा लोग मरते हैं, ये बिस्तर पर सोना ही छोड़ देते हैं।
  • अपनी सेहत का मजा नहीं ले सकते क्योंकि ये सोचतें हैं कि शायद कल बीमार हो जायेंगे।
  • सिर्फ बदतर हालात की उम्मीद ही नही करते, बल्कि जो कुछ भी होता है, उसे भी बदतर बना देते हैं।
  • ये आम को नहीं गुठली को देखते हैं।
  • ये यकीन करते हैं कि सूरज सिर्फ परछाईयाँ बनाने के लिए ही चमकता है।
  • अपनी खुशियों को भूलकर सिर्फ मुसीबतों को गिनते हैं।
  • ये विश्वास करते हैं कि कड़ी मेहनत किसी की तकलीफ नहीं पहुँचाती, लेकिन फिर भी सोचते हैं कि चांस क्यों लिया जाए।

आशावादी कैसे बने?

इतना मजबूत बने कि कोई भी चीज आपके मन की शांति को भंग न कर सके। जिस किसी से भी मिले, अच्छी  सेहत, खुशी और तरक्की की ही बात करें, सभी दोस्तों को यह अहसास कराएँ कि उनमें भी खूबियाँ है।  हर चीज के अच्छे पहलू को ही देखें। सिर्फ सबसे बढ़िया के बारे में सोचे एवं उम्मीद करें।  जितने कि आप अपनी कामयाबी के लिए होते हैं, दूसरें के कामयाबी के लिए भी उतने ही उत्साहित बनें।  पुरानी गलतियों को भूलकर आने वाली उपलब्धियों की ओर बढ़ें।  सबसे मुस्कुराकर मिलें अपने को बेहतर बनाने के लिए इतना ज्यादा वक्त दें कि आपके पास दूसरों की बुराई करने का वक्त ही न बचे।  इतने बड़े बने कि चिंता न सताए और इतने उदार बनें कि गुस्सा न आए।

दूसरा कदम: हर काम को तुरंत करने की आदत डालें।

Step: Make a habit of doing it now.

हम सभी अपनी जिंदगी में कभी न कभी काम में टालमटोल करते हैं। टालमटोली की आदत घटिया रवैये को बढ़ावा देती है। लोग टालमटोली की आदत को खूबसूरत शब्दों की आड़ में यह कहकर छिपाते भी हैं कि मैं तो अभी इसपर बारीकी से सोच रहा हूँ या मैं तैयारी कर रहा हूँ, वे सालो—साल या तो सोचते रहते हैं या तैयारी करते रहते हैं। एसे लोग कभी कामयाब नहीं होगें। बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा है— जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कभी भी कल पर नहीं टालें।

Never leave till tomorrow which you can do today. Benjamin Franklin

सारे विजेता टालमटोल करना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए।

तीसरा कदम: अहसानमंद होने का नजरिया बनाएँ।

Step 3: Develop an attitude of gratitude.

अपनी नियामतों को गिनें, मुश्किलों को नहीं।  हमारे पास बहुत कुछ है, जिसके लिए हमें शुक्रगुजार होना चाहिए।  इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम जिस हाल में हैं, उसी हाल में संतुष्ट रहें।

चौथा कदम: लगातार ज्ञान हासिल करने की आदत डालें।

Step 4: Get into a continuous education programme.

बौद्धिक शिक्षा जहाँ आपके दिमाग पर असर करती हैं, वहीं मूल्यों पर आधारित​ शिक्षा आपके दिल पर ।  असलियत में जो शिक्षा दिल पर असर न डाले, वह नुकसानदेह हो सकती है।  एक ज्यादा पढ़े—लिखे लेकिन नैतिक शिक्षाहीन व्यक्ति के मुकाबले नैतिक शिक्षावाला व्यक्ति जिंदगी में आगे बढ़ने और सफलता पाने में ज्यादा काबिल होता है।

सही शिक्षा दिल और दिमाग, दोनों पर असर डालती है। एक अनपढ़ चोर मालगाड़ी से माल चुराकर ले जाएगा, जबकि एक पढ़ा—लिखा चोर पूरी मालगाड़ी ही चुराकर ले जाएगा।  बिना मूल्यों के दिमागी शिक्षा समाज के लिए आफत को पैदा करती है।

  • बहुत बार हम अक्लमंदी और सही फैसले में फर्क नहीं कर पाते।
  • एक इंसान अक्लमंद तो हो सकता है लेकिन उसके फैसले गलत हो सकते हैं।
  • अपने सलाहकारें को ध्यान से चुनिए और अपनी समझ का इस्तेमाल कीजिए।
  • औपचारिक शिक्षा होने या न होने पर भी कोई व्यक्ति सफल हो सकता है और होगा भी। अगर उनमें ये पाँच खूबियाँ हो:
  1. चरित्र (Character)

     2. कमिटमेंट (Commitment)

  1. दृढ़ विश्वास (Conviction)
  2. विनम्रता (Courtesy)
  3. साहस (Courage)

पढ़े लिखें वे लोग हैं जो किसी भी हालात में साहस और अक्लमंदी से काम करना तय करते हैं। अगर उनमें अक्लमंदी और बेवकूफी अच्छे और बुरे सौम्यता और अश्लीलता के बीच चुनाव करने की काबिलियत है ​तो उनके पास अक्षर की डिर्गियाँ हो या न हो, वे सही मायने में शिक्षित हैं।

छात्रों का अपनी खास  खूबियों और काबिलियत को खोए बिना जिंदगी के लिए तैयार रहना ही सही मायनों में बहुमुखी शिक्षा है।

कुदरत ने हर इंसान को कोई—न—कोई खूबी दी है।

जानकारी का भ्रम होना शिक्षा नहीं अज्ञानता है।

अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है जितनी कि किसी काम को सही ढंग से सीखने की इच्छा न होना।

अज्ञानता कोई बुराई नहीं है लेकिन अज्ञानता के साथ भविष्य बनाने की बात सोचना बेवकुफी है। कुछ लोग अज्ञानता को ही इकट्ठा करते रहते है। और उसे शिक्षा समझने की भूल करते हैं।

किसी भी चीज को उसके सही रूप में देखने और उसे जैसा किया जाना चाहिए उस रूप में करने की काबिलियत को ही व्यवहारिक बुद्धि कहते हैं। कामयाब लोगों के पास पाँच ज्ञानेद्रियों के अलवा एक छठी ज्ञानेन्द्री होती है जिसे व्यवहारिक ज्ञानेन्द्री कहते हैं। भरपूर व्यवहारिक बुद्धि का होना ही बुद्धिमत्ता कहलाता है।

बीते हुए कल का गौरव और शिक्षा से काम नहीं चलता। हमें अपने ज्ञान की धार को लगातार तेज करते रहना पड़ेगा।

जिस तरह हमारे शरीर को रोजाना अच्छे खाने की जरूरत होती है, उसी तरह हमारे दिमाग को भी रोजाना अच्छे विचारों की जरूरत होती है।

ज्ञान एक शक्ति है, यह बात सही नहीं है। सच यह है कि ज्ञान में शक्ति बनने की क्षमता है और यह तभी शक्ति बनता है जब उसका इस्तेमाल किया जाता है।

लगातार अच्छी शिक्षा से अच्छी सोच को बढ़ावा मिलता है। अच्छी सोचवाले ऐसे विजेता होते हैं, जो अपनी कमजोरियों को तो जानते हैं, लेकिन अपना घ्यान अपनी ताकत पर रखते हैं। जबकि दूसरी तरफ हारने वाले अपनी ताकत को जानते हुए भी अपनी कमजोरियों पर ही फोकस रखते हैं।

पाँचवाँ कदम: अच्छे स्वाभिमान का निर्माण

Step 5: Build a positive self esteem.

स्वाभिमान वह जरिया है जिसके द्वारा हम खुद को महसूस करते हैं। हम किसी चीज या बात के बारे में जैसा महसूस करते हैं, वैसा ही उसके प्रति व्यवहार करेंगे। अगर आप अच्छे स्वाभिमान का निर्माण करना चाहते हैं तो उन लोगों के लिए कुछ करें जो बदले में आपको कुछ नही दे सकते।

छठा कदम: बुरे असर से दूर रहें।

Step 6: Stay away from Negative influences.

ज्यादातर लोग अपने दिलों में कुछ करने की चाह लिए ही मर जाते हैं। घटिया सोच वाले लोगों से दूर रहें। याद रखें कि एक इंसान का चरित्र सिर्फ इस बात से नहीं जाहिर होता कि वह कैसी संगत में रहता है, बल्कि इस बात से भी कि वह कैसी संगत से दूर रहता है।

सिगरेट चरस—गांजा और शराब से दूर रहें।

अभद्र और अश्लील साहित्य, घटिया फिल्में और टेलीविजन प्रोग्राम, अपशब्द और रॉक म्यूजिक का हमारे अवचेतन मन पर बुरा असर पड़ता है।

सातवाँ कदमजो काम जरूरी है उन्हें पसंद करना सीखें।

Step 7: Learn to like the things that need to be done.

जो जरूरी है उससे शुरू करें, फिर जो मुमकिन है वह करें, और आप अचानक पाएँगे कि आप नामुमकिन काम भी करने लगे हैं।

आठवाँ कदम: अच्छे ढंग से दिन की शुरूआत करें।

Step 8 : Start your day with a positive.

दिन की शुरूआत कोई अच्छा विचार पढ़ने या सुनने से करें। अगर आप अपनी जिंदगी में बदलाव लाने की सोच रहे हैं तो यह काम तुरंत और उत्साह से शुरू कर देना चाहिए।

विजेता और पराजित में अंतर (Winners verses Losers)

विजेता  हमेशा एक समाधान का हिस्सा होता है।

पराजित हमेशा समस्या का हिस्सा होता है।

विजेता के पास हमेशा कुछ करने का एक प्रोग्राम रहता है।
पराजित के पास कुछ न करने का बहाना।

विजेता कहता है, मैं आपके लिए कर देता हूँ।
पराजित का कहना है कि यह मेरा काम नहीं है।

विजेता के पास समाधान है हर समस्या के लिए।
पराजित के पास समस्या है हर समाधान के लिए।

विजेता कहता है, यह काम मुश्किल जरूर है, लेकिन मुमकिन है।
पराजित का मानना है, यह काम मुमकिन हो सकता है, लेकिन बेहद मुश्किल है।

गलती करने पर विजेता कहता है, मैं गलत था।
पराजित गलती करने पर कहता है, इसमें मेरी गलती नहीं थी।

विजेता कमिटमेंट करता है।
पराजित केवल वायदा करता है।

विजेता के पास कामयाबी के सपने होते हैं।
पराजित के पास सिर्फ स्कीम्स होती हैं।

विजेता कहता है, मुझे कुछ करना चाहिए।
पराजित कहता है, कुछ होना चाहिए।

विजेता टीम का हिस्सा होता है।
पराजित टीम के हिस्से करता है।

विजेता उप​लब्धियों को देखता है।
पराजित तकलीफों को देखता है।

विजेता देखता है कि क्या संभव है।
पराजित देखता है कि क्या असंभव है।

विजेता हर किसी की जीत में विश्वास रखता है।
पराजित विश्वास रखता है कि उसे जीतने के लिए किसी को हारना होगा।

विजेता आने वाले कल को देखता है।
पराजित बीते हुए कल को देखता है।

विजेता थर्मोस्टेट जैसा होता है।
पराजित थर्मामीटर जैसा होता है।

विजेता सोचकर बोलता है।
पराजित बोलकर सोचता है।

विजेता नम्रता के साथ अपनी ठोस दलीलें पेश करता है।
पराजित कड़े शब्दों में कमजोर दलीलें पेश करता है।

विजेता करके दिखाता है।
पराजित कुछ होने का इंतजार करता है।

विजेता अपने उसूलों पर टिका रहता है और छोटी—मोटी बातों पर समझौता कर लेता है।
पराजित छोटी—मोटी बातों पर अड़ा रहता है और अपने उसूलों पर समझौता कर लेता है।

विजेता समानुभूति के इस विचार में विश्वास करता है कि दूसरों के साथ वैसा व्यवहार मत करो जो तुम चाहते हो कि दूसरे तुमसे न करें।
पराजित इस विचार में विश्वास करता है कि दूसरे के कुछ करने से पहले आप ही उसे कुछ कर दो।

अध्याय दो

सफलता (Success)

कामयाबी के उपाय (Winning strategies)

सफलता सिर्फ एक संयोग नहीं है। यह हमारे नजरिए का नतीजा है और अपना नजरिया हम खुद चुन सकते हैं।

असाधारण व्यक्ति अवसर ढूँढ़ता है जबकि साधारण व्यक्ति सुरक्षा खोजता है। जरूरत है कि हम अपना ध्यान क्या चाहिए पर लगाएँ न कि इस बात पर कि हमें क्या नहीं चाहिए।

सफलता सिर्फ कुछ बुनियादी उसूलों का लगातार पालन करने का नतीजा है। असफलता कुछ गलतियों को लगातार दोहराने का नतीजा है।

मूल्यवान लक्ष्य की लगातार प्राप्ति का नाम ही सफलता है।- अर्ल नाइटिंगिल

सफलता और खुशी हाथ में हाथ डाले चलती है। जो आप चाहते हैं उसे पाना सफलता है, और जो आप पाते हैं उसे चाहना खुशी है।

सफलता की राह में कुछ रूकावटें असली या ख्वाबी।

  • अहंकार
  • सफलता—असफलता का डर: स्वाभिमान की कमी
  • योजना का न होना
  • लक्ष्यों का न होना
  • जिंदगी के बदलाव
  • टालमटोल
  • पारिवारिक जिम्मेदारियाँ
  • आर्थिक सुरक्षा
  • दिशाहीनता
  • पैसे की लालच की वजह से दूर की न सोचना
  • सारा बोझ खुद उठाना
  • क्षमता से ज्यादा अपने आपको बांधना
  • ​कमिंटमेंट का न होना
  • ट्रेनिंग की कमी
  • दृढ़ता की कमी
  • प्राथमिकताओं की कमी

जीतने वाली बात— हमें श्रेष्ठता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए, न कि परिपूर्णता हासिल करने की। सफल व्यक्ति असफल लोगों से दस—बीस गुना ज्यादा काबिल नहीं होते हैं। हमें किसी एक क्षेत्र में 1000 प्रतिशत सुधार की आवश्यकता नहीं है, हमें केवल हजार क्षेत्रों में 1 प्रतिशत सुधार की जरूरत है। जो कि बहुत आसान है। यही जीतने वाली बात है।

जिंदगी के संघर्ष दुखद या सुखद हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इन संघर्षों का सामना कैसे करते हैं। बगैर कोशिश के कामयाबियाँ नहीं मिलती।

सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि जिंदगी में हम कितनी उँचाई तक जाते हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि हम गिरकर कितनी बार उठते हैं। गिरकर बार—बार उठने की शक्ति ही सफलता का रास्ता बनाती है।

सफल व्यक्ति कोई महान काम नहीं करते, वे छोटे कामों को ही महान ढंग से करते हैं।

असफल दो तरह के होते हैं, वे जो करते तो हैं लेकिन सोचते नहीं, दूसरे वे जो सोचते तो हैं लेकिन कुछ करते नहीं।

जिंदगी में हम हालात तो नहीं चुन सकते मगर अपना नजरिया तो जरूर चुन सकते हैं। चुनाव हमारा है, चाहे हम हालात पर विजय पाएँ या हालात का शिकार बनें। हमारी स्थिति नहीं, बल्कि किसी स्थिति में हम अपने आपको कैसे सँभालते और ढालते हैं, उसी से हमारी सफलता तय होती है।

खूबियाँ जो व्यक्ति को सफल बनाती है।

Qualities that make a person successful.

  1. इच्छा (Desire) — सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा लक्ष्य को हासिल करने की गहरी इच्छाशक्ति से आती है। नेपोलियन हिल ने लिखा था— इंसान जो सोच सकता है और जिसमें यकीन करता है, वह उसे हासिल भी कर सकता है। कमजोर इच्छा से बड़ी कामयाबियाँ नहीं मिल सकती।
  1. कमिटमेंट (Commitment)-निष्ठा और बुद्धिमत्ता कमिटमेंट बनाने के दो मजबूत आधार हैं। सफलता सिर्फ एक संयोग नहीं है, यह हमारे नजरिए का नतीजा है। हार की सोच वाले सुरक्षा चाहते हैं, जबकि जीत की सोच वाले नए अवसरों को तलाश करते हैं। हार मान लेनेवाले मरने से ज्यादा जीने से डरते हैं। असफल होना कोई गुनाह नहीं है लेकिन सफलता के लिए कोशिश न करना गुनाह  जरूर है।
  2. जिम्मेदारी (Responsibility) — जिम्मेदारी जब हमारी दिली इच्छा भी बन जाती है, तो उससे संतोष और खुशी मिलती है— जार्ज ग्रिटर।

अच्छे चरित्र वाले व्यक्ति जिम्मेदारियों को स्वीकार करते हैं। वे अपने फैसले खुद करते हैं और अपने जीवन को दिशा भी खुद देते हैं। इसमें खतरा भी होता है और जबावदेही भी, जो कई बार तकलीफदेह भी हो सकता है।

  1. कड़ी मेहनत — सफलता संयोग से नहीं मिलती। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। हेनरी फोर्ड का कहना है — जितनी ज्यादा मेहनत करोगे उतना ही किस्मत साथ देगी।

श्रेष्ठता सिर्फ किस्मत की बात नहीं, वह कड़ी मेहनत और बहुत सी प्रैक्टिस का नतीजा होती है। कड़ी मेहनत और प्रैक्टिस व्यक्ति के काम बेहतर बनाते हैं, फिर चाहे वह कोई भी काम कर रहा हो।

इंतजार करने वालों को चीजें मिलती तो हैं लेकिन सिर्फ वही मिलती हैं, जो संघर्ष करने वाले छोड़ देते हैं।- अब्राह्म लिंकन

  1. चरित्र (Character) — चरित्र व्यक्ति के नैतिक मूल्यों विश्वासों और शख्सियत से मिलकर बनता है। सफलता और आलोचना के बीच एक गहरा संबंध है। जितनी ज्यादा सफलता, उतनी ही ज्यादा आलोचना।

चरित्र इमानदारी, निस्वार्थ भाव, आपसी समझ, धारणा, साहस, वफादारी और आदर जैसे गुणों का मिला जुला रूप है।

एक अच्छे चरित्र वाले शख्सियत क्या है?

यह अपने आप में एक ओहदा है।

यह संयमित है।

यह स्थिर है।

यह दृढ और आत्म—विश्वासी है, बगैर जिद्दी हुए।

यह लिहाज रखना है।

यह बहाना बनाना नहीं है।

यह जानती है कि विनम्रता और तहजीब छोटी कुर्बानियाँ लेती है।

यह पिछली गलतियों से सीख लेना है।

इसका जन्म और दौलत से कोई वास्ता नहीं है।

यह दूसरों को बर्बाद करके कभी अपना निर्माण नहीं करती।

यह असलियत है दिखावा नहीं।

यह उँचे रूतबे के साथ चलकर भी अपनी असलियत बनाए रखती है।

यह मीठी जुबान, अच्छी नजर और एक नेक मुस्कान है।

यह छिपा हुआ गर्व है जो अत्याचार के खिलाफ खड़ा रहता है।

यह खुद में और दूसरों के साथ सहज है।

यह एक निरालापन है जो जीत की बात देता है।

यह कमाल करती है।

यह चमत्कार करती है।

यह पहचानना आसान है, लेकिन समझाना मुश्किल ।

यह जिम्मेदारियों को स्वीकार करना है।

यह विनम्रता है।

यह एक उदारता है जीत में भी और हार में भी।

यह नाम और यश नहीं है

यह कोई मैडल नहीं है।

यह स्थायी है।

यह निराकार है।

यह विनम्रता है बगैर दीनता के।

यह बड़प्पन है बगैर छिछोरेपन के।

यह एक आत्म—अनुशासन और ज्ञान है।

यह आत्म—संतुष्ट है।

यह उदार विजेता और समझदार पराजित है।

मुश्किल हालात में कुछ लोग रिकार्ड तोड़ते हैं और दूसरे खुद टूट जाते हैं। जिस तरह बिना कटाई—घिसाई के हीरे में चमक नहीं आती और आग में तपाए बिना लौहा स्टील नहीं बनता, ठीक उसी तरह मुश्किलें व्यक्ति के चरित्र को दिखाती हैं, और उसका खुद से परिचय कराती हैं।

  1. सकारात्मक विश्वास (Positive Believing) — सही जीवन जीना आसान नहीं है, मगर गलत जिंदगी जीना भी कौन सा आसान है, बल्कि ज्यादा ही मुश्किल है। सही विश्वास सही सोच से कई गुणा बढ़कर है। सही विश्वास आत्म विश्वासी होने का नजरिया है, जो तैयारी से आता है।
  2. जितना पाएँ उससे ज्यादा दें (Give more than you get) — अगर आप जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं तो जितना चाहिए उससे जयादा चलें और इसी थोड़ा ज्यादा चलने में ही आपका कोई कंपीटिशन नहीं रह जाता। आपको बदले में जो मिलता है, क्या आप उससे थोड़ा ज्यादा काम करने को तैयार हैं? सफलता का निचोड़ इन चार शब्दों में है, और फिर थोड़ा ज्यादा, विजेता जो करना चाहिए वो तो करते ही हैं— और फिर थोड़ा ज्यादा। योग्यता बगैर भरोसा और जिम्मेदारी के एक बोझ होती है।
  3. लगातार कोशिश करने या हिम्मत न हारने की शक्ति (The power of persistence) — लगातार कोशिश करते रहने के आगे कुछ नहीं टिक सकता। प्रतिभा भी नहीं— इससे ज्यादा कोई आम बात है ही नहीं कि बहुत सारे प्रतिभाशाली असफल लोग देखने को मिलते हैं। जीनियस भी नहीं— हारे हुए जीनियस तो एक कहावत है। शिक्षा भी नहीं— दुनिया पढ़े—लिखे नासमझों से भरी हुई है।  लगातार कोशिश और दृढ इच्छा ही सर्वसमर्थ है। कैल्विन कूलिज

लगातार कोशिश करने का मतल​ब है— कमिटमेंट और दृढ—संकल्प । कमिटमेंट और दृढ़—संकल्प एक फैसला है। कुछ सेकेंड और मिनटों के प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी सालों—साल प्रैक्टिस करते हैं।

  1. अपने काम पर गर्व (pride of performance) — काम में बेहतरी तब आती है, जब काम करने वाला बेहतर काम करके गर्व महसूस करता है। काम पर गर्व अहंकार को नहीं दिखाता, बल्कि खुशी और विनम्रता को दिखाता है। काम की क्वालिटी और काम करने वाले की क्वालिटी एक —दूसरे से अलग नहीं हो सकती। आधे मन से किए गए काम आधे नतीजें नहीं लाते बल्कि कोई नतीजा ही नहीं लाते।
  2. एक विद्यार्थी बनने के लिए तैयार रहें—अपना आदर्श खोजें (Be willing to be a student- Get a mentor)

एक गुरू वह होता है जिसके बीते हुए कल आपके आने वाले कल के मार्गदर्शक बन सकते हैं। किसी ऐसे आदर्श को खोजें जो आपको अपना शिष्य बना सके। अपने आदर्श या गुरू का चुनाव सोच—समझकर करें। अच्छे गुरू आपकी प्यास नहीं बुझाते, बल्कि आपको प्यासा बनाएँगें। वे आपको जिज्ञासु बनाते हैं। हम सबमें खूबियों से भरा खजाना छिपा है। जरूरत इस बात की है कि हम उन्हें उभारें और व्यवहार में लायें।

असफलता के कारण (Reasons for failure)

  1. खतरे उठाने में झिझक— फैसला न करने के कारण कई मौके खो जाते हैं। इसकी आदत पड़ जाती है और यह आदत एक से दूसरे में फैलती है। खतरे तो उठाएँ पर जुआ नहीं खेलें।
  2. लगातार कोशिश की कमी— ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नहीं हारते, बल्कि वे इसी लिए हार जाते हैं, क्योंकि मैदान ही छोड़ देते हैं। सफलता का रहस्य दो बातें में छिपा है— लगातार कोशिश और विरोध। जो करना चाहिए उसकी लगातार कोशिश करो और डटे रहो, और जो न करने की चीज है, उसका विरोध करो।
  3. तुरंत इच्छापूर्ति— एक सीमित नजरिया में हम अभी की सोचते हैं दूर की नहीं। हम तुरंत इच्छापूर्ति के दौर में जी रहे हैं। जब लोग रातों—रात अमीर बनना चाहते हैं तो वे गलत रास्ते अपनाते हैं और अपने जमीर को बेच देते हैं।
  4. प्राथमिकताओं की कमी— जब हमारी प्राथमिकताएँ सही नहीं होती है तो हम समय की बर्बादी करते हैं और यह महसूस भी नहीं करते कि समय की बर्बादी जीवन की बर्बादी है। सफलता के नियम पढ़ने या रटने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि यह उन्हें समझने और अमल में लाने से मिलती है।
  5. शार्टकट्स की तलाश— हमें यह समझना चाहिए कि मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। पर कभी न कभी हम सभी किसी न किसी रूप में मुफ्तखोरी के गुनाहगार होते हैं। कई बार हम लोग आसान रास्ता ढ़ूँढते हैं लेकिन अंत में पाते हैं कि वही रास्ता सबसे मुश्किल है।
  6. स्वार्थ और लालच— जरूरतों की पूर्ति की जा सकती है, पर लालच की नहीं। स्वाभिमान की कमी से लालच पैदा होता है जो झूठा घमंड, दिखावा और बनावट और बराबरी करने की आदत के रूप में दिखाई देता है।
  7. ढ्ढ़ विश्वास की कमी— ढ्ढ़ विश्वास की कमी वाले लोग बीच का रास्ता अपनाते हैं, और बताइए कि सड़क के बीच का रास्ता अपनाने वालों का क्या हाल होता है? ढ्ढ़ विश्वास की कमी वाले लोग किसी उसूल पर नहीं टिकते। वे दूसरों को खुश करने के लिए गलत काम भी कर कर देते है। दृढ़ विश्वास आस्था से उपजता है।

हेनरी फोर्ड ने कहा है— अगर आप सोचते हैं कि आप कर सकते हैं या आप यह सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते हैं, तो आप दोनों ही तरह ठीक हैं।

दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं

वे लोग जो कुछ करते हैं।

वे लोग जो कुछ होते हुए देखते हैं।

वे लोग जो यह सोचकर हैरान होते हैं कि हुआ क्या?

  1. कुदरत के उसूलों को न समझने की कमी (Lack of understanding of nature’s law) — सफलता किस्मत का नहीं बल्कि उसूलों का नाम है। और ये उसूल कुदरत के हैं। बदलाव कुदरत का उसूल है। हर तरक्की एक बदलाव है, लेकिन हर बदलाव एक तरक्की नहीं है। हमें हर बदलाव को परखना चाहिए और तभी स्वीकार करना चाहिए, जब वह हमारे लिए उपयोगी हो।
  2. योजना बनाने और तैयारी करने की अनिच्छा (unwillingness to plan and prepare)

जीतने की इच्छा सभी में होती है, मगर जीतने के लिए तैयारी करने की इच्छा बहुत कम लोगों में होती है।- विंस लॉम्बार्डी

तैयारी करने से आत्मविश्वास पैदा होता है, जो प्लानिंग और प्रैक्टिस के अलावा कुछ भी नहीं है। सफलता और असफलता के बीच वहीं अंतर है जो बिल्कुल सही और लगभग सही में है।

किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए पूरी तैयारी करना सबसे जरूरी बात है।

7 Ps :

Purpose + Principle + Planning + Practice + Preservence + Patience + Pride = Preparation

उद्देश्य + सिद्धांत + योजना + अभ्यास + लगातार प्रयास + धैर्य + गर्व = पूरी तैयारी

तैयारी का मतलब है—हार को सह लेना, लेकिन हार न मानना। तैयारी का मतलब है अपनी गलतियों से सीख लेना।

  1. बहानेबाजी (Rationalizing) — विजेता बारीकी से जाँच परख तो करते हैं, लेकिन बहानेबाजी नहीं करते— ऐसा हारने वाले करते हैं। हारने वाले के पास काम न कर पाने पर बहानों की लंबी चौड़ी लिस्ट होती है।
  2. पिछली गलतियों से न सीखना (Not learning from past mistakes) — असफलता हमें बहुत कुछ सीखा सकती है अगर हमारा नजरिया ठीक हो। समझदार लोग अपनी गलतियों से सीखते हैं, लेकिन बुद्धिमान लोग दूसरों की गलतियों से भी सीखते हैं। हमारी जिंदगी इतनी लंबी नहीं है कि हम सिर्फ अपनी ही गलतियों से सीखें।
  3. अवसरों को पहचानने में अयोग्यता (Inability to recognize opportunity)—अवसर बाधाओं के रूप में आते हैं। यही वजह है कि बहुत से लोग उन्हें पहचान नहीं पाते। याद रखें बाधा जितनी बड़ी होगी, अवसर उतना ही बड़ा होगा।
  4. डर से असुरक्षा (Fear) – आत्मविश्वास की कमी और टालमटोल की सोच पैदा होती है। डर हमारी क्षमता और योग्यता दोनों को बर्बाद करता है। हम सीधा सोच भी नहीं सकते।  यह हमारे रिश्तों और सेहत को भी बर्बाद कर देता है।  असफल होने का डर कई बार असफलता से भी बुरा हो सकता है।

14.प्रतिभा का इस्तेमाल न करने की अयोग्यता (Inability to use talent) — विलियम जेम्स के अनुसार इंसान अपनी क्षमता का सिर्फ 10—12 प्रतिशत ही इस्तेमाल कर पाता है। ज्यादातर लोगों की जिंदगी में सबसे दुखद बात यह है कि वे कुछ करने की इच्छा दिल में लिए हुए ही मर जाते हैं।

किसी ने एक बुजुर्ग से पूछा, जिंदगी का सबसे बड़ा बोझ क्या है? बुजुर्ग ने उदासी से कहा, किसी बोझ का न होना ही सबसे बड़ा बोझ है।

  1. अनुशासन की कमी (Lack of discipline) : जीवन में जिसने कोई भी खास मुकाम हासिल किया है, वह अनुशासन के बिना नहीं किया, चाहे वह खेलकूद हो, पढ़ाई—लिखाई हो या फिर व्यापार। लगातार कोशिश की कमी अनुशासनहीनता है। अनुशासन में रहने के लिए आत्म नियंत्रण और कुर्बानी की जरूरत तो है ही, साथ ही मन को भटकने से रोकने और लालच से बचने की भी जरूरत है। अनुशासन और पछतावा, दोनों ही दुखदायक है। ज्यादातर लोगों को इन दोनों में से किसी एक को चुनना होता है। जरा सोचिए, इन दोनों में से कौन ज्यादा तकलीफदेह है?
  2. कमजोर स्वाभिमान (Poor Self-Esteem): कमजोर स्वाभिमान का मतलब है— आत्म सम्मान और आत्म—महत्व की कमी। निकम्मापन और आलस्य कमजोर स्वाभिमान का नतीजा होते हैं और बहानेबाजी भी इसी का नतीजा होती है। निकम्मापन उस जंग की तरह है, जो बढ़िया से बढ़िया लोहे को भी खा जाती है।
  3. ज्ञान की कमी (Lack of knowledge): अज्ञानता के क्षेत्र की जानकारी ज्ञान की तरफ बढ़ाया गया पहला कदम है। वह व्यक्ति जो यह सोचता है कि वह सब कुछ जानता है, उसे ही सबसे ज्यादा सीखने की जरूरत है। अज्ञानता से ज्यादा बड़ी समस्या है— ज्ञान का भ्रम होना, जो व्यक्ति को गुमराह कर सकता है।
  4. भाग्यवादी नजरिया (Fatalistic attitude): भाग्यवादी नजरिया लोगों को जिंदगी में जिम्मेदारी स्वीकार करने से रोकता है। वे सफलता और असफलता, दोनों को ही किस्मत का नतीजा मानते हैं। वे खुद को किस्मत के भरोसे छोड़ देते हैं। घटिया लोग भाग्य में विश्वास करते हैं। हिम्मती और पक्के इरादों वाले लोग वजह और उसके नतीजों में भरोसा करते हैं।

एथलीट्स पंद्रह से​केंड के प्रदर्शन के लिए 15 साल तक मेहनत और प्रैक्टिस करते हैं उनसे पूछकर देखिये क्या वे भाग्य से जीतते हैं। किस्मत तभी साथ देती है जब पूरी तैयारी और अवसर मिलते हैं, ​कोशिश और पूरी तैयारी के बिना, भाग्य का संयोग नहीं बनता।

  1. उद्देश्य की कमी (Lack of purpose): जब लोग बिना उद्देश्य के और दिशाहीन होते हैं तब वे अवसरों को देख नहीं पाते। अगर किसी व्यक्ति में कुछ पाने की इच्छा हो, अपने लक्ष्य तक पहुँचने की दिशा हो, फोकस पर टिके रहने की लगन हो और कड़ी मेहनत के लिए जरूरी अनुशासन हो तो बाकी चीजें आसान हो जाती है। लेकिन अगर आपमें ये गुण नहीं है तो आपकी बाकी खूबियाँ बेकार हो जाती है।
  2. साहस की कमी (Lack of courage): सफल लोग चमत्कारों या आसान रास्तों की फिराक में नहीं रहते। ये मुसीबतों से उबरने के लिए साहस ओर हिम्मत जुटाते हैं। जब हमारा मन साहस से भरा हुआ हो तो हम अपने डर और रास्ते के मुश्किलों से उबर जाते हैं। हिम्मत का ​मतलब डर का न होना नहीं है, हिम्मत का ​मतलब डर पर काबू पाना है।

सफलता के कुछ मुख्य उपाय

  • जीत के लिए खेले हार के लिए नहीं।
  • दूसरों के गलतियों से सीखें।
  • उँचे नैतिक चरित्र वाले लोगों के साथ नाता जोड़ें।
  • जितना पाएँ उससे ज्यादा दें।
  • बिना कुछ दिए कुछ पाने की कोशिश न करें।
  • हमेशा दूर की सोचें।
  • अपनी ताकत को परखें और अपना निर्माण करें।
  • हमेशा दूर तक के असर को नजर में रखकर फैसला लें।
  • अपनी ईमानदारी के साथ समझौता न करें।

अध्याय: तीन

प्रेरणा (Motivation)

खुद को और दूसरो को भी रोजाना प्रेरित करना। Motivating yourself and others everyday

सबसे बड़ी प्रेरणा किसी व्यक्ति के विश्वास से आती है। इसका मतलब यह है कि उसे किसी भी काम में पूरा विश्वास करके जिम्मेदारी उठानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को प्रेरित नहीं करते सकते हैं।  लोग अपने आपको खुद ही प्रेरित कर सकते हैं। कोई अन्य व्यक्ति आपको खुद से प्रेरणा लेने के लिए बस प्रेरित कर सकते हैं।  लोगों को खुद से प्रेरित करने के लिए हमें उनकी जरूरतों और इच्छाओं को समझना पड़ता है।  प्रेरणा ओर कार्य क्षमता में सीधा संबंध है।

अंतर्प्रेरणा (Inspiration) से सोच में बदलाव आता है जबकि प्रेरणा (Motivation) से काम में बदलाव आता है।

प्रेरणा आग के समान है। अगर आप इसमें कोयला न डालते रहेंगे तो यह बुझ जाएगी। प्रेरणा को काम लिए उद्देश्य (Motivation= Motive + action) भी कह सकते हैं।

बाहरी प्रेरणा (External Motivation): प्रेरणा बाहरी चीजों से प्रभावित होती है, जैसे पैसा, सामाजिक मान्यता, यश, डर।

डर से पैदा हुई प्रेरणा (Fear Motivation): इससे काम जल्दी पूरे होते हैं। इसका असर तुरंत होता है। वक्त पर काम पूरा होने से नुकसान नहीं होता। कुछ समय के लिए आदमी की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। ऐसा अक्सर होता है कि बाघ जब हिरण के पीछे भागता है तो ज्यादातर हिरण चकमा देकर अपनी जान बचाकर भाग निकलते हैं, ऐसा क्यों? क्योंकि इनमें से एक तो अपनी जान के लिए भाग रहा है, दूसरा अपने खाने के लिए।

प्रोत्साहन से आने वाली प्रेरणा (Incentive Motivation): बाहरी प्रेरणा प्रोत्साहन का रूप ले सकती है और प्रोत्साहन के कई रूप हैं जैसे— बोनस, कमीशन, मान्यता, इत्यादि।

हम सभी प्रेरित हैं या तो सही रूप से या गलत रूप से ।

हम एक नशेबाज से नशे करने का प्रेरणा ले सकते हैं अथवा नशे नहीं करने का प्रेरणा ले सकते हैं। नकारात्मक प्रेरणा हमें आसान रास्ता अपनाने को प्रेरित करती है जो कि आखिर में ​मुश्किल रास्ता बन जाता है।

अंदरूनी प्रेरणा (Internal Motivation): अंदरूनी प्रेरणा हमारे अंदर की संतुष्टि ही है। यह प्रेरणा कामयाबी या जीत के लिए नहीं ​बल्कि अंदरूनी भरपूरता के लिए होती है जो कुछ कर लेने के अहसास से आती है।  जहाँ प्रेरणा को पहचानना जरूरी है, वहीं सफलता के लिए उसे मजबूत रखना भी जरूरी है।  अपने लक्ष्य को अपने सामने रखें और रोजाना सुबह—शाम पढ़ें, याद करें।

प्रेरणा से प्रेरणाहीनता की ओर ले जाने वाले चार कदम (The four steps from motivation to demotivation)

  1. प्रेरित लेकिन प्रभावहीन
  2. प्रेरित और प्रभावशाली
  3. असरदार मगर प्रेरणाहीन
  4. प्रेरणाहीन और बेअसर

प्रेरणाहीनता के कारण

  • नाजायज आलोचना
  • गलत आलोचना
  • सरेआम बेइज्जती
  • निकम्मे या घटिया कर्मचारी को ईनाम देने से अच्छे काम करने वाले का हौसला गिर जाता है।
  • असफलता या असफलता का डर।
  • कामयाबी से मिली आत्म—संतुष्टि की वजह से लापरवाही
  • सही दिशा न होना
  • निश्चित लक्ष्यों की कमी।
  • कमजोर सवाभिमान
  • प्रा​थमिकता की कमी।
  • गलत आत्म—सुझाव
  • दफ्तर की राजनीति
  • बेइंसाफी का बर्ताव
  • पाखंड या दोगलापन
  • घटिया स्टैंडर्ड
  • बार—बार बदलाव
  • अधिकार के बिना जिम्मेदारी

अध्याय: चार

स्वाभिमान (Self-Esteem)

सकारात्मक स्वाभिमान और छवि बनाना (Building positive self-esteem and image)

स्वाभिमान का मतलब है खुद के बारे में हम क्या सोचते हैं, कैसा महसूस करते हैं, खुद के बारे में हमारा नजरिया, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कैसा है? उँचा स्वाभिमान हमें खुशहाल संतुष्ट और मकसदों से भरी जिंदगी देता है। जब तक आप खुद को बहुत उपयोगी नहीं समझेंगे तब तक आपमें एक उँचा सवाभिमान नहीं आ सकता। अपने बारे में जो हम महसूस करते हैं, वही दूसरों के व्यवहार में हमारे प्रति झलकता है।

इंसान अपने बारे में खुद की सोच की हद से आगे नहीं बढ़ सकता, चाहे फिर वह जैसी भी हो।

स्वाभिमान:

  • संकल्प और विश्वास को मजबूत करता है।
  • जिम्मेदारी उठाने की इच्छा पैदा करता है।
  • आशावादी नजरिए का निर्माण करता है।
  • संबंधों में बेहतरी और खुशहाली की ओर ले जाता है।
  • दूसरों की जरूरतों के प्रति व्यक्ति को संवेदनशील बनाता है और देखभाल का नजरिया बनाता है।
  • व्यक्ति को महत्वाकांक्षी और आत्म—प्रेरित बनाता है।
  • नए अवसरों और चुनौतियों का स्वागत करने के लिए व्यक्ति को तैयार करता है।
  • काम और रिस्क लेने की क्षमता को बेहतर बनाता है।
  • आसानी और समझदारी से व्यक्ति को आलोचना और तारीफ करने और पाने, दोनों में सहायता करता है।

उँचे स्वाभिमान वाले लोग और कमजोर स्वाभिमान वाले लोग की कुछ विशेषताएँ:

उँचे स्वाभिमान वाले लोग कमजोर स्वाभिमान वाले लोग
उपायों की बात करेंगे लोगों की बात करेंगे
खयाल रखेंगे आलोचना करेंगे
विनम्र होंगे घमंडी होंगे
आथोरिटी का आदर करेंगे विरोध करेंगे
दृढ़ विश्वास का साहस होगा जी हजूरी करेंगे
विश्वास करेंगे भ्रमित रहेंगे
चरित्र का खयाल रखेंगे झूठी इज्जत का खयाल रखेंगे
स्थिर रहेंगे उत्तेजित रहेंगे
जिम्मेदारियाँ स्वीकार करेंगे दुनिया को दोष देंगे
हित की बात करेंगे स्वार्थी होंगे
आशावादी होंगे भाग्यवादी होंगे
दूसरों को समझेंगे लालची होंगे
सीखना चाहेंगे समझेंगे कि इन्हें सब मालूम है
संवेदनशील होंगे भावुक होंगे
एकांतप्रिय होंगे अकेलापन महसूस करेंगे
बातचीत करेंगे बहस करेंगे
आत्म—गुण में विश्वास करेंगे धन—दौलत में विश्वास करेंगे
सही राह को जानेंगे भटके होंगे
अनुशासित होंगे अनुशासनहीन होंगे
आत्म—शक्ति से प्रेरित होंगे बाहरी कारणों से प्रेरित होंगे
सम्मान करेंगे दूसरों को नीचा दिखाएँगे
सलीकेदार होंगे नीच और घटिया होंगे
शराफत का पालन करेंगे मतलब के लिए कुछ भी करेंगे
देना जानते हैं सिर्फ लेना जानते हैं

कमजोर स्वाभिमान की वजहें (Cause of Low of self-esteem)

गलत आत्मसुझाव

ऐसा तब होता है जब हम अपने बारे में जाने—अनजाने में ऐसी बाते कहते हैं।

  • मेरी याददाश्त कमजोर है।
  • मैं हिसाब में कमजोर हूँ।
  • मैं अच्छा खिलाड़ी नहीं हूँ।
  • मैं थका हुआ हूँ।

माहौल

घर— माँ—बाप की तरफ से अपने बच्चे को जो सबसे खास चीज मिल सकती है वह है— मजबूत बुनियाद।

परविश—उँचे स्वाभिमान वाले माँ—बाप अपने बच्चों को सही विचार, अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्य और विश्वास देकर उँचे स्वाभिमान वाला और दृढ़विश्वास वाला बनाते हैं। इसका उलटा भी इतना ही सच है। दरअसल बच्चे वही सीखते हैं जो जीते हैं।

शिक्षा— अनजान होना शर्म की बात नहीं है, लेकिन सीखने की इच्छा न होना शर्म की बात जरूर है।

गलत आदर्श

अनुचित तुलना करना

असफल और सफल: एक के बाद दूसरा असर—कामयाबी से कामयाबी और नाकामयाबी से नाकामयाबी का ही जन्म होता है।

नाकामयाबी का मतलब नाकामयाब होना नहीं है।

माता—पिता, शिक्षकों और अधिकारियों की पूर्णता के लिए बे​बुनियादी या जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएँ।

अनुशासन की कमी।

माँ—बाप, गुरू या अधिकारियों द्वारा लगाए गए लेबल।

सही मूल्यों की शिक्षा।

 उँचा स्वाभिमान बनाने के कदम

  • अपनी कमियों को खूबियों में बदले।
  • समझभरी नासमझी सीखें।
  • उन लोगों के लिए कुछ करें जो बदले में आपको कुछ भी नहीं दे सकते।
  • प्रशंसा लेना और देना सीखें।
  • जिम्मेदारी को स्वीकार करें।
  • अनुशासन का पालन करें।
  • अपने लक्ष्य तय करें।
  • उँचे चरित्र वाले लोगों से नाता जोड़ें।
  • दोस्ती की परख।
  • साथियों का दबाव।
  • थोड़ा बहुत चलता है या हर चीज हद के अंदर ठीक है।
  • बाहरी दबावों की अपेक्षा अंदरूनी शक्ति से चलें।
  • खुद को सही आत्म सुझाव दें।
  • हमारी सबसे बड़ी बड़ी ताकत, हमारी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन सकती है।
  • धैर्य रखें।

अध्याय: पाँच

आपसी मेलजोल (Interpersonal Skills)

अच्छी शख्सियत का निर्माण (Building a pleasing personality)

हमारी समस्याएँ व्यवसाय संबंधित नहीं व्यक्ति संबंधित है। जब हम, लोगों से जुड़ी समस्याएँ सुलझा लेते हैं तब हमारे व्यवसाय से संबंधित समस्याएँ सुलझा लेते हैं तब हमारे व्यवसाय से संबंधित समस्याएँ खुद—ब—खुद सुलझ जाती है। वस्तु ज्ञान से ज्यादा जरूरी है व्यक्ति ज्ञान।

सफल लोग अपनी शख्सियत खुशनुमा और आकर्षक बना लेते हैं और यही बात उन्हें करिश्माई बनाती है।

जिंदगी की सबसे खूबसूरत नैमत यह है कि जब भी किसी का भला किया जाए तो अपना भला कुदरती रूप से अपने आप हो जाता है। —रॉल्फ वाल्डो इमर्सन

दुनिया हमें वैसी नहीं दिखती जैसी वह है बल्कि वैसी दिखती है जैसे हम हैं। ज्यादातर दूसरे लोगों का व्यवहार हमारे ही व्यवहार का आइना होता है।

अच्छीशख्सियत बनाने के कदम (Steps to building a positive personality)

पहला कदम: अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें।

Step 1: Accept Responsibility

जिम्मेदारियाँ उस व्यक्ति की तरफ खिंची चली आती है, जो उन्हें कंधे पर उठा सकता है।

—एल्बर्ट हब्बर्ड

जब लोग अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ को स्वीकार करते हैं तो अपनी उन्नति का मार्ग खुद ही खोल देते हैं।

इलजाम लगाने का खेल बंद करें। जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ना छोटेपन का नतीजा है। समाज की बर्बादी चोर—उच्चकों की करतूतों से नहीं होती, बल्कि उच्छे लोगों के निकम्मेपन से होती है।

बुराई के जड़ जमाने के लिए इतना काफी है कि अच्छे लोग कुछ न करें, और बुराई जड़ पकड़ लेगी।

—एडमंड बर्क

दूसरा कदम: दूसरे के लिए सोच

Step 2: Consideration.

अगर हम एक दूसरे के लिए सोचे तो यह दुनिया हसीन हो जाऐगी। दूसरों का ख्याल करें और नम्रता व शिष्टता दिखाएँ।

तीसरा कदम: सबकी जीत की सोचें।

Step 3: Think win/win.  

जब हम अपने ग्राहकों, अपने परिवार, अपने मालिक अपने कर्मचारियों की सेवा करते हैं तो हमें जीत खुद व खुद मिल जाती है।

चौथा कदम: अपने शब्दों को सावधानी से चुनें।

Step 4: Choose your words carefully.

व्यवहारिक रूप से समझदार बनें। व्यवहारिक रूप से समझदार होने का मतलब है कि आप अपने शब्दों का चुनाव समझदारी और होशियारी से करें।

सोच के बोलें, न कि बोल के सोचे। बुद्धिमत्ता और बेवकूफी में यही फर्क है। बोलिए कम, कहिए ज्यादा।

पाँचवाँ कदम: आलोचना और शिकायत करें।

Step 5: Do n’t criticize and complain.

नकारात्मक आलोचना कभी न करें। सकारात्मक आलोचना कर सकते हैं। हाँ व्यवहार की आलोचना करें न कि व्यक्ति की, क्योंकि जब हम व्यक्ति की आलोचना करते हैं, तो उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाते हैं। सही आलोचना फायदेमंद हो सकती है और इसे एक अच्छी सलाह के रूप में स्वीकार करना चाहिए। नाजायज आलोचना एक छिपी हुई तारीफ का रूप है। आम लोग जीतने वालों को पसंद नहीं करते। जिस पेड़ पर सबसे ज्यादा फल लगते हैं, उसी पर सबसे ज्यादा पत्थर मारे जाते हैं।

छठा कदम: मुस्कराएँ और दयालु बनें।

Step 6: Smile and be kind.

मुस्कुराना त्यौरियाँ चढ़ाने से आसान है। इससे सूरत निखरती है। मुस्कान एक से दूसरे को फैलती है। एक चिड़—चिड़े व्यक्ति के साथ कोई नहीं रहना चाहेगा।

सातवाँ कदम: दूसरों के व्यवहार का सही अर्थ लगाएँ।

Step 7: Put positive interpretation on other people’s behavior.

कुछ लोग एक भ्रम से पीड़ित रहते हैं। वे समझते हैं कि दुनिया उनके खिलाफ है और पीछे पड़ी हुई है। मगर ऐसा नहीं है। एक सकारात्मक शुरूआत करने से हमें एक आकर्षक व्यक्तित्व बनाने का अच्छा मौका मिलता है जिससे हमारे रिश्ते बेहतर बनते हैं।

आठवाँ कदम: अच्छे श्रोता बनें।

Step 8: Be a good listener.

आपके सूनने के ढंग से पता चलता है कि आप कितनी परवाह करते हैं। दूसरे के प्रति जब ऐसा खयाल रखने वाला नजरिया आप दिखलाते हैं तो वह व्यक्ति खुद को महत्वपूर्ण महसूस करता है। जिससे उसका हौसला बढ़ जाता है और वह आपकी बातें सुनने के लिए और भी अच्छी तरह तैयार हो जाता है।

नवाँ कदम: उत्साही बनें।

Step 9: Be Enthusiastic.

बिना उत्साह के कभी कोई बड़ा काम नहीं हुआ। —रॉल्फ वाल्डो इमर्सन

उत्साह और सफलता साथ—साथ चलती है, मगर उत्साह का नंबर पहला है। उत्साह आत्मविश्वास को बढ़ाता है, आत्मबल को बढ़ाता है, वफादारी को बढ़ाता है और यह अमूल्य है। उत्साह एक तरह की आदत है जो अभ्यास से सीखी जा सकती है।

 दसवाँ कदम: ईमानदारी और सच्चाई से प्रशंसा करें।

Step 10: Give honest and Sincere appreciation.

इंसान की सबसे गहरी इच्छाओं में से एक है— प्रशंसा पाने की इच्छा। सच्ची तारीफ करना उन सबसे बड़े उपहारों में से है जो हम किसी को दे सकते हैं। इससे दूसरा व्यक्ति खुद को महत्वपूर्ण समझता है। खुद को महत्वपूर्ण समझने की ईच्छा ज्यादातर लोगों में गहरी होती है। यह इंसान के लिए एक बड़ी प्रेरक हो सकती है।

ग्यारहवाँ कदम: जब हम कोई गलती करते हैं, तो हमें उसे तुरंत और खुशी से स्वीकार करना चाहिए।

Step 11: When we make a mistake, we should accept it immediately and willingly.

कुछ लोग जीते हैं और सीखते हैं कुछ लोग जीते हैं लेकिन कभी सीखते ही नहीं। गलतियाँ हमें सीखने का एक मौका देती है, उससे सीखना बहुत जरूरी है, उनसे न सीखना ही सबसे बड़ी गलती है। गलती स्वीकार करने से दूसरा व्यक्ति विनम्र पड़ जाता है।

 बारहवाँ कदम: जब दूसरे लोग अपनी गलती का अहसास करके इसे स्वीकार करें तो उन्हें मुबारकबाद दें, और इज्जत से बाहर निकलने का रास्ता भी दें।

Step 12: When other person realizes and admits that he has made a mistake congratulate him and give him a way out to save face.

अगर हम उसे इज्जत से बाहर निकलने का रास्ता न दें तो हम उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाते हैं।

तेरहवाँ कदम: तर्क करें, तकरार करें।

Step 13: Discuss but don’t argue.

तकरार और बहस से बचा जा सकता है और थोड़ी सावधानी बरतकर बहुत सी रंजिशों से परे रहा जा सकता है। किसी बहस को जीतने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसमें पड़ा ही न जाए। बहस की जीत में भी हार है और हार में भी हार है। बहसवाजी झूठे अहंकार से पैदा होती है। बहस करना हारती हुई लड़ाई में लड़ने के समान है।

बहुत पहले मैंने सीख लिया था कि सुअर से कुश्ती कभी नहीं लड़ें। आप तो मैले हो जाएँगे साथ ही सुअर को भी अच्छा लगेगा। —सायस चिंग

चौदहवाँ कदम: इधरउधर की या पीठ पीछे बातें करें।

Step 14: Don’t Gossip.

जो लोग आपके सामने दूसरों की बातें करते हैं वे आपकी पीठ पीछे आपके बारें में भी बातें करते हैं। गप्पे मारना एक ऐसी कला है जिसमें कुछ खास कहा भी नहीं जाता, और न ही कुछ  अनकहा छूटता है। छोटे लोग दूसरों के बारें में बातें करते हैं बीच के लोग चीजों के बारें में बातें करते हैं और महान लोग सुझाव के बारें में बातें करतें हैं।

पंद्रहवाँ कदम: अपने वायदों को कमिटमेंट में बदलिए।

Step 15: Turn your promises into commitments.  

वायदा मन की इच्छा को जाहिर करता है। कमिटमेंट एक ऐसा वायदा हो जो हर हाल में पूरा होगा, चाहे कुछ भी हो। कमिटमेंट चरित्र से आता है और विश्वास को बढ़ाता है।  ​कमिटमेंट के बगैर रिश्ते बिना गहराई के और खोखले होते हैं। कमिंटमेंट के बिना कोई चीज आज तक स्थायी नहीं बनी।

सोलहवाँ कदम: एहसान तो माने, लेकिन एहसानमंदी की उम्मीद करें।

Step 16: Be grateful but not expect gratitude.

हमें एहसानमंद होना चाहिए। एहसानमंदी एक असहसास भी है और भावना भी है। एहसानमंदी जीने का एक तरीका होना चाहिए जिसे हम जितना भी दिखाएँ कम है। यह मुस्कान धन्यवाद या प्रशंसा के भाव से जाहिर हो सकता है।

 सत्रहवाँ कदम: भरोसेमंद बनें और वफादारी निभाने का प्रयास करें।

Step 17: Be dependable and practice loyalty.

एक कहावत है एक छटाँक वफादारी एक सेर चालाकी से ज्यादा अच्छी है। काविलियत बहुत जरूरी है, लेकिन भरोसेमंद होना अनिवार्य है।

अठारहवाँ कदम: द्वेष न रखें, क्षमा करें और भूल जाएँ।

Step 18: Avoid bearing grudges, forgive and forget.

कूड़ा इकट्ठा करनेवाले न बनें। जब एक व्यक्ति माफ करने से इंकार कर देता है तो वह उन सभी दरवाजों को बंद कर देता है, जिन्हें खोलने की किसी दिन उसे जरूरत पड़ सकती है। जब हम मन में बैर और द्वेष का भाव रखते हैं तो सबसे ज्यादा खुद अपने को नुकसान पहुँचाते हैं। जहाँ द्वेष रखना अच्छी बात नहीं है वहीं बार—बार चौट खाना भी अच्छी बात नहीं है। किसी ने ठीक ही कहा है, तुम मुझे एक बार धोखा देते हो, तो तुम पर लानत है, तुम मुझे दोबारा धोखा देते हो, तो मुझ पर लानत है।

उन्नीसवाँ कदम: सच्चा, ईमानदार और निष्कपट बनने की प्रैक्टिस करें।

Step 19: Practice honesty, integrity and sincerity.

कई बार सच्चाई की चमक शैतान को रोशनी दिखाने के बजाए और अंधा बना देती है। अपने उपर भरोसेमंद होने की छाप लगवाइए और अपनी पहचान एक विश्वसनीय व्यक्ति के रूप में बनाइए। अगर कोई चीज है जो घर में दफ्तर में और समाज में रिश्तों को बनाती है तो वह है सच्चाई और ईमानदारी।

बीसवाँ कदम: विनम्रता की प्रैक्टिस करें।

Step 20: Be understanding and caring.

विनम्रता के बिना आत्म—विश्वास अहंकार है। विनम्रता सारी खूबियों की बुनियाद है।

इक्कीसवाँ कदम: दूसरों को समझने और खयाल रखनेवाला बनें।

Step 21: Be understanding and caring.

रिश्तों में हम सभी से गलतियाँ होती है, कभी—कभी हम दूसरों की जरूरतों के प्रति रूखे या असंवेदनशील हो जाते हैं, खासकर उनके प्रति जो हमारे बहुत करीबी हैं। फिर इससे मायूसी और नाराजगी पैदा होती है। मायूसी से बचने के लिए आपसी समझदारी जरूरी है।

बाइसवाँ कदम: हर रोज विनम्र बनने की प्रैक्टिस करें।

Step 22: Practice courtesy on a daily basis.

विनम्रता का मतलब है—दूसरों का खयाल रखना। यह उन दरवाजों को खोलती है जिन्हें खोलना मुश्किल हो। एक तहजीब वाला मगर कम प्रतिभाशाली इंसान जीवन में बहुत आगे बढ़ेगा, बजाए उसके जो प्रतिभाशाली तो है लेकिन तहजीब वाला नहीं है।

तेरसवाँ कदम: हँसनेहँसाने की आदत डालें और खुशमिजाज बनें।

Step 23: Develop a sense of humor.

अपने पर हँसना सीखें क्योंकि यह सबसे ज्यादा महफूज और सुरक्षित है। खुद पर हँसने से आपको गिरकर उठने की शक्ति मिलती है। सारी दुनियाँ में हँसी कुदरत की ऐसी देन है जो हर दर्द की दवा है। हँसी मर्ज को बदल तो नहीं सकती, लेकिन उसके दर्द को कम कर सकती है।

चौबीसवाँ कदम: दूसरों का मजाक उड़ाएँ और ही नीचादिखाएँ।

Step 24: Don’t be sarcastic and put others down.

घटिया सोच वाले लोगों के मजाक में ​ताने कसना, दूसरों को नीचा दिखाना और तकलीफ पहुँचानेवाली बातें शामिल होती है।  जिस मजाक में ताने और दूसरों का मजाक उड़ाने की भावना शामिल हो वे घटियापन दिखाते हैं। अपमान चोट लगने से ज्यादा तकलीफदेह होता है।

पच्चीसवाँ कदम: एक दोस्त के लिए दोस्त बनें।

हम सही नियोक्ता, सही कर्मचारी, जीवनसाथी, माता पिता, बच्चे आदि की तलाश में रहते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि हमें भी सही इंसान बनना है। अनुभव से पता चला है कि कोई भी पूर्ण व्यक्ति नहीं है।

रिश्ते अपने आप नहीं बन जाते, उन्हें बनाने में समय लगता है। रिश्ते इन आधारों पर बनते हैं, दयालुता, आपसी समझ और आत्म—त्याग, और इनसे टूटते हैं— ईर्ष्या, स्वार्थ, अहंकार और रूखा व्यवहार। रिश्तों को महत्व देकर उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। संपूर्णता की तलाश में निराशा ही हाथ लगती है।

छब्बीसवाँ कदम: समानुभूति दिखाएँ।

Step 26: Show empathy.

अध्याय छह

अवचेतन मन और आदतें (Subconscious mind and habits)

अच्छी आदतें और चरित्र का निर्माण (Forming positive habits and character)

हम सभी सफल जीवन जीने के लिए पैदा हुए हैं, मगर हमारी आदतें और माहौल हमें असफलता की ओर ले जाते हैं। हमारा जन्म जीत के लिए हुआ है, मगर माहौल की वजह से हमने हारना सीख लिया है। हमारे सोचने का तरीका भी आदत का एक हिस्सा बन जाता है।  हम आदतें बनाते हैं और आदतें हमारा ​चरित्र बनाती है। इससे पहले कि आप आदत को अपनाने की सोचें, आदत आप को अपना चुकी होती है।  हमें सही सोचने की आदत डालने की जरूरत है।  किसी ने कहा है, हमारे विचार काम की तरह ले जाते हैं, काम से आदते बनती है, आदतों से चरित्र बनता है और चरित्र से हमारा भविष्य बनता है।

पागलपन की परिभाषा है कि एक ही काम को बार—बार करना, लेकिन हर बार अलग नतीजे की अपेक्षा रखना। अगर आप वही करते हैं जो आप करते रहे हैं तो आपको वही मिलता रहेगा जो आपको मिलता रहा है। आदतों को बदलने के लिए सबसे मुश्किल बात यह है कि जो चीज काम नहीं कर रही, उसे कैसे भुलाया जाए और जो काम कर है, उसे कैसे अपनाया और बढ़ाया जाए।

हमारे चेतन मन के पास सोचने की शक्ति है। यह स्वीकार कर सकता है और अस्वीकार भी। मगर अवचेतन मन सिर्फ स्वीकार करता है। अवचेतन मन एक गाड़ी की तरह है और चेतन मन एक ड्राईवर की तरह। शक्ति तो गाड़ी में होती में होती है, मगर उसका कंट्रोल ड्राइवर के पास।

अवचेतन मन हमारे फायदे या नुकसान के लिए कम कर सकता है। उसमें सोचने समझने की क्षमता नहीं है। जब हम सफल नहीं होते हैं तो हमारे अवचेतन मन को दोबारा और नए और सही तरीके से रिप्रोग्राम करना पड़ेगा।

चरित्र का निर्माण करना एक आदत सी बन जाती है। अगर हम एक अच्छी शख्सियत बनाना चाहते हैं तो हमें अपनी आदतेां को गहराई से जाँचना होगा। जो बात कभी—कभी मौज—मस्ती करने की वजह से शुरू होती है वह एक स्थायी दोष या कमी बन जाती है।

सफल लोगों का राज यह है कि वे काम करने की उन आदतों को डाल लेते हैं जो असफल लोग करना नहीं चाहते और न ही करते हैं।

अच्छी आदतों के निर्माण के लिए हम 21 दिन का फार्मूला अपना सकते हैं। हम कोई भी काम लगातार 21 दिन तक करते रहें तो यह हमारी आदत बन जाती है।

आत्म सुझाव चेतन और अवचेतन मन दोनों को प्रभावित करते हैं, जिसका असर लोगों के नजरिए और व्यवहार पर पड़ता है।

आत्म—सुझाव अवचेतन मन को ढ़ालने —प्रोग्राम करने का तरीका है। आत्म—सुझाव अच्छे या बुरे हो सकते हैं। जब हम बुरे या अच्छे आत्म—सूझाव को बार—बार दोहराते हैं तो यह हमारे अवचेतन मन के गहराई मे बैठ जाता है और एक असलियत का रूप ले लेता है।

आत्मसुझाव को असलियत में बदलने के तरीके:

  1. वर्तमान काल के अपने आत्म—सुझावों की एक लिस्ट बनाएँ।
  2. दिन में कम से कम दो बार आत्म—सुझावों को दोहराएँ: एक बार सुबह और एक बार रात को।
  3. इसे लगातार 21 दिन तक दोहराएँ, जब तक कि यह आदत न बन जाए।
  4. सिर्फ आत्म—सुझाव अकेले काम नहीं करेगा, इसके लिए कल्पना की भी जरूरत होती है।
  5. आप जो पाना चाहते हैं, मन में उसका चित्र बनाने और देखने के सिलसिले को ही कल्पना करते हैं।

अध्याय सात

लक्ष्य बनाएँ (Goal Setting)

अपने लक्ष्य बनाना और हासिल करना (Setting and achieving your goals)

 

ज्ञान आपको मंजिल तक पहुँचने में मदद करता है वशर्ते कि आपको अपनी मंजिल का पता हो। जीवन के रास्तों पर चलते हुए अपनी आँखे अपने लक्ष्य पर जमाएँ रहें। आम पर ध्यान दें, गुठली पर नहीं।

तेज धूप और शक्तिशाली मैगनीफाईग ग्लास के बावजूद भी कागज को आग तब तक नहीं पकड़ सकती, जब तक आप से हिलाते रहेंगे। लेकिन अगर थोड़ी देर आप उसे स्थिरता से पकड़े रहेंगे तो एकदम कागज आग पकड़ लेगा। ध्यान लगाने और फोकस करने में ऐसी ताकत होती है। लोग लक्ष्यों को अक्सर इच्छा या सपने समझने की भूल करते हैं। सपने और इच्छाएँ सिर्फ चाहत के सिवा कुछ नहीं है। चाहतें कमजोर होती है।

सपनों को असलियत में बदलने के कदम:

  1. लक्ष्य निश्चित और साफ लिखें।
  2. इसे हासिल करने का प्लान बनाएँ।
  3. पहली दो बातों को रोज दो बार पढ़ें।

ज्यादातर लोगों के लक्ष्य नहीं बनाने के कुछ कारण:

  1. निराशावादी नजरिया— संभावनाओं की बजाए हमेशा रास्ते के बाधाओं को देखना।
  2. असफलता का डर— लोगों के मन में यह विचार रहते हैं कि अगर वे लक्ष्य बनाएँ और उन्हें हासिल न कर पाएँ तो वे फेल हो गए।
  3. इच्छा या अभिलाषा की कमी: यह हमारे जीवन मूल्यों का नतीजा है और साथ ही साथ एक भरपूर जिंदगी जीने की इच्छा का अभाव।
  4. अस्वीकार किये जाने का डर— अगर मैं सफल नहीं हो पाया तो लोग क्या कहेंगे?
  5. टालमटोल: कभी न कभी तो मैं अपना लक्ष्य बनाउँगा। यह इच्छा के अभाव की तरह ही है।
  6. कमजोर स्वाभिमान— जब इंसान अपनी अंदरूनी शक्ति से नहीं चलता और जीवन में प्रेरणा का अभाव होता है तो यह कमजोर स्वाभिमान को दिखाता है।
  7. लक्ष्य का महत्व न समझना — किसी ने उन्हें इसके बारे में सिखाया नहीं और उन लोगों ने कभी लक्ष्य के महत्व को समझा ही नहीं।
  8. लक्ष्य कैसे बनता है— ज्ञान की कमी— लोग लक्ष्य बनाने के तरीकों को नहीं जानते हैं। उन्हें एक साफ नक्शें की जरूरत है जिसे वे गाइड बनाकर अपना सकें।

 

लक्ष्यों को SMART होना चाहिए।

  1. S- SPECIFIC (स्पष्ट) — मैं वजन घटाना चाहता हूँ। यह सिर्फ एक इच्छा है। मैं 90 दिनों में 10 पाउंड वजन घटाउँगा, यह लक्ष्य है।
  2. M-MEASURABLE (मापा जा सके) — अगर हम नाप नहीं सकते, तो हम इसे हासिल भी नहीं कर सकते।
  3. A-ACHIEVABLE (हासिल करने के काबिल) — चुनौती भरा और मुश्किल भी हो लेकिन नामुमकिन न हो, क्योंकि असंभव लक्ष्य हमें निराश ही करेगा।
  4. R-REALISTIC (वास्तविक) — लक्ष्य वा​स्तविकता से भरा होना चाहिए।
  5. T-TIME BOUND (समयबद्ध) — काम के शुरू और अंत का एक निश्चित समय होना चाहिए।

लक्ष्य के समावधि

  1. थोड़ा समय (Short Term) — एक साल तक
  2. बीच का समय (Mid Term) — तीन साल तक
  3. लंबा समय (Long Term) — पाँच साल तक

लक्ष्य पाँच साल से भी ज्यादा समय के हो सकते हैं लेकिन तब वे जीवन के उद्देश्य बन जाते हैं।

हमारी जिंदगी एक पहिए की तरह है जिसमें छह स्पोक्स (Spokes) लगे होते हैं।

  1. परिवार (Family)
  2. आर्थिक (Financial)
  3. शारीरिक (Physical)
  4. मानसिक (Mental)
  5. सामाजिक (Social)
  6. आध्यात्मिक (Spiritual)

इनमें से कोई भी स्पोक अपनी जगह से खिसक जाए तो हमारे जीवन का संतुलन डगमगा जाता है। हमें दो तरह की शिक्षा चाहिए। एक वह जो हमें रोजी रोटी कमाना सिखाए, दूसरी वह जो हमें जीने का ढंग सिखाए।

लक्ष्य हमारे जीवन को अर्थ देते हैं। ये हमें अपने उद्देश्यों की तरफ ले जाते हैं। यह सफलता की ओर पहला कदम है। चाँद को लक्ष्य बनाएँ । अगर आप चूक भी गए तो एक तारा तो बन ही जाएँगें।

छोटी योजनाएँ न बनाएँ उनमें इंसान के दिलों में जोश भरने वाला जादू नहीं होता—बड़ी योजनाएँ बनाएँ पूरी आशा के साथ उँचाई की ओर बढ़े और काम करें।

महात्मा गाँधी के अनुसार सात महापाप हैं:

  1. मेहनत के बिना दौलत
  2. अंतरात्मा के बिना आनंद
  3. चरित्र के बना ज्ञान
  4. नैतिक मूल्यों के बिना व्यापार
  5. इंसानियत के बिना साइंस
  6. त्याग के बिना धर्म
  7. सिद्धांत के बिना राजनीति

पैसा से खरीदा जा सकता है:

हँसी मगर खुशी नहीं।

बिस्तर मगर नींद नहीं।

किताबें मगर ज्ञान नहीं।

एक घड़ी मगर समय नहीं।

साथी मगर दोस्त नही।

चमक—दमक मगर खूबसूरती नहीं।

खाना मगर भूख नहीं।

मकान मगर घर नहीं।

दवा मगर सेहत नहीं।

अँगूठी मगर जीवनसाथी नहीं।

जीवन में दो तरह के दुख होते हैं।

  1. न मिलना जो चाहा।
  2. मिलना जो चाहा।

सफलता बिना आत्म—संतुष्टि के व्यर्थ है। जब तक जीवन का कोई अर्थ और उद्देश्य न हो जीवन सूना और उदास है फिर चाहे किसी के पास कितनी ही इज्जत पैसा और डिग्रियाँ क्यों न हो।

सफलता का ब्लूप्रिंटजीतने वाले अलग काम नहीं करते, वे हर काम अलग ढंग से करते हैं।

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