दूध पुष्टिकारक या हानिकारक

ऐसा माना जाता है कि दूध में भरपूर मात्रा में कैल्सियम रहता है। इसी रहने की वजह से दूध पीने की सलाह दी जाती है ताकि हड्डियां मजबूत बनी रहे। पर अध्ययनों से यह पता चला है कि दूध ओस्टियोपोरोसिस से बचाने के बजाय इसका कारण है। ओस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती है। लेकिन ओस्टियोपोरोसिस में योगदान से जयादा चिंता का विषय दूध में हार्मोन होना और इसका संक्रामक रोगों का वाहक होना है। एक आम गाय प्राकृतिक रूप से रोज 5 लीटर दूध दे सकती है। जबकि आज की सताई हुई आधुनिक डेयरी की गायें प्रतिदिन 50 लीटर तक दूध देती है। ऐसा इसीलिए है कि आजकल दूध बढाने के लिए गायों को बड़ी म़ात्रा में बोविन ग्रोथ हार्मोन जैसे खास हार्मोन दिए जाते हैं जो उनके थनों को इतना बढ़ा देता है कि अक्सर वे जमीन पर घसीटते हैं। इससे संक्रमण होने लगता है और गायों को लगातार एंटीवायोटिक की जरूरत पड़ती है। ये बृद्धि संबंधित हार्मोन एंटीवायोटिक और पस प्रोसेसिंग के बावजूद दूध में रह जाते हैं जो दूध उत्पादों की नियमित सेवन करने वाले लोगों खासकर बच्चों पर खतरनाक चिकित्सकीय प्रभाव डालते हैं।  बी जी एच (बोविन ग्रोथ हार्मोन) एवं अन्य हार्मोन ने किशोर लड़कियों के औसत स्तन आकार में बृद्धि की है और वयस्क महिलाओं में स्तन कैंसर बढ़ानेवाला बड़ा कारण भी है।

लोगों का यह केवल भ्रम है कि अगर दूध नहीं पीयेंगे तो हड्डियां कमजोर हो जायेगी। जरा सोचिये जानवरों के हड्डियां क्या कमजोर होती है। वे तो उम्रभर दूध नहीं पीते। गाय के दूध में कैल्सियम कहाँ से आता है जबकि गाय तो केवल घास खाती है। गाय तो दूध पीती नहीं फिर उसके दूध में कैल्सियम कहाँ से आया।

आजकल  गाय का दूध बच्चों में डायबीटिज का सबसे बड़ा कारण है। दूध भोजन नहीं है। मनुष्य ही केवल ऐसा प्राणी है, जो जीवनभर दूध पीता है। मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अन्य जीवों का दूध पीता है।

ईश्वर ने शिशु के आरंभिक कुछ महीनों के लिए ही दूध बनाया है और वो भी उसकी माँ का दूध। डायबीटीज टाइप एक से पीड़ित बच्चों के संदर्भ में देखें तो गाय का दूध शरीर की प्राकृतिक रोग—प्रतिरोधक क्षमता को बिगाड़ता है और बाहरी स्रोतों से प्राप्त इंसुलिन पर निर्भर रहने के कारण (पैंक्रिया) की बीटा कोशिकाएँ समाप्त होने लगती है।

केवल दूध छोड़ देने से इंसुलिन पर निर्भर रोगी के जीवन में ब्लड सुगर को सही रखने के लिए इंसुलिन की जरूरी मात्रा में तुरंत लगभग 40 प्रतिशत की कमी आ जाती है। दूध छोड़ने से मतलब समस्त दुग्ध उत्पाद छोड़ने से है।

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