सबसे बड़ी पवित्रता

सप्तम अध्याय नीति : 19

सबसे बड़ी पवित्रता

चाणक्य नीति के सप्तम अघ्याय के उन्नीसवीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मन में बुरे विचार न आने देना, मुँह से कोई गलत बात न कहना, अपने सभी इन्द्रियों को वश मे रखना, सभी प्राणियों पर दया करना तथा सबकी भलाई करना यही मनुष्य के लिए सबसे बड़ी पवित्रता है।

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