मर्दन से गुण बढ़ते हैं

नवम अध्याय नीति : 13 &14

मर्दन से गुण बढ़ते हैं

चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के तेरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गन्ने को और तिलों को पेरे जाने से, शूद्रों से सेवा कराने से, स़्त्री से संभोग करने से, सोने को पीटे जाने से, पृथ्वी में परिश्रम करने से, चंदन को घिसे जाने से,दही को मथे जाने से तथा पान को चबाने से ही इन सबके गुण बढ़ते हैं।

वहीं चौदहवीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गंभीर रहने पर व्यक्ति अपनी गरीबी में भी सुख से रह लेता है। साफ किये हुए साधारण कपड़े भी अच्छे लगते हैं। बासी भोजन गर्म किये जाने पर स्वादिष्ट हो जाता है। यदि कुरूप व्यक्ति अच्छे आचरण एवं स्वभाववाला हो, तो सभी उससे प्रेम करते हैं। गुणों से कमियों में भी निखार आ जाता है।

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