सुंदरता

सप्तदश अध्याय नीति : 11

सुंदरता

चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हाथों की सुंदरता दान से है न कि कंगन पहनने से, शरीर स्नान से शुद्ध होता है, न कि चंदन लगाने से, सज्जन सम्मान से संतुष्ट होते हैं न कि भोजन से, आत्मा का ज्ञान होने पर ही मोक्ष मिलता है न कि श्रंगार करने से।

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