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ग़ज़ल (३)

आपका आना कितना खुशगवार लगता है,
पर इस तरह छोड़कर जाते क्यों हैं?
हम भी मोहब्बत कम नहीं करते,
आप इस तरह प्यार जताते क्यों हैं?

आपको भी कुछ पाने की तमन्ना है,
हमे इस तरह तरसाते क्यों हैं?
हमने दिल लगाया गलती नहीं की,
मुझे देखकर इस तरह मुस्कुराते क्यों है?

आंखों से कह दिए सब कुछ आपने,
ओठ खोलने में शरमाते क्यों हैं?
मेरी जिन्दगी में बहार लाया आपने,
अब आग लगाकर दिल जलाते क्यों हैं?

पल गुजरता है सौ साल की मानिंद,
आप इस तरह मुझे भूल जाते क्यों हैं?
हमें आपसे कोई शिकवा नहीं है,
आपको गिला है निषाद तो छुपाते क्यों हैं?

संजय कुमार निषाद

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