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विद्वान सब जगह पूजा जाता है।

अष्टम अध्याय नीति : 19—21

विद्वान सब जगह पूजा जाता है।

चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के उन्नीसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्वान का ही सम्मान होता है, खानदान का नहीं। नीच खानदान में जन्म लेनेवाला व्यक्ति यदि विद्वान हो तो उसका सभी जगह सम्मान होता है।

वहीं बीसवी नीति में आचार्य कहते हैं कि विद्या के कारण ही मनुष्य को समाज में आदर, प्रशंसा, मान—सम्मान तथा जो कुछ भी वह चाहे सब मिल जाता है, क्योंकि विद्या का सभी सम्मान करते हैं।

वहीं इक्कीसवी नीति में आचार्य कहते हैं कि मांसाहारी, शराबी तथा मूर्ख पुरूष के रूप में पशु हैं। मनुष्य के आकारवाले ये पशु पृथ्वी के लिए भार जैसे ही हैं।

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