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निर्धनता

षष्ठदश अध्याय नीति : 16

निर्धनता

चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के सौलहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि निर्धनता जीवन का अभिशाप है। समाज में भाई—बंधुओं के बीच गरीबी में जीना अच्छा नहीं है। निर्धन होकर समाज में जीने से वनवास अच्छा है।

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