गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है—
“बड़े भाग्य मानुस तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथ ही गावा।”
अर्थात् मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह केवल बड़े भाग्य से प्राप्त होता है। यह पंक्ति सुनने में जितनी गूढ़ और प्रेरक है, उतनी ही यह हमें आत्मचिंतन के लिए विवश भी करती है। यदि सचमुच प्रत्येक मनुष्य इतना भाग्यशाली है, तो फिर संसार में इतनी असमानताएँ क्यों दिखाई देती हैं?
यदि हम चारों ओर दृष्टि डालें, तो यह स्पष्ट दिखता है कि हर मानव का जीवन एक‑सा नहीं है। कहीं अपार धन‑दौलत है, तो कहीं दो वक्त की रोटी का अभाव। कोई अत्यंत ज्ञानवान और आत्मविश्वास से भरा है, तो कोई अशिक्षा और हीनभावना से ग्रस्त। कोई बिना अधिक परिश्रम के सफलता की ऊँचाइयों को छू लेता है, तो कोई कठिन मेहनत के बावजूद भी जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करता रहता है। एक ही कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्रों में भी जमीन‑आसमान का अंतर दिखाई देता है—एक निडर, आत्मविश्वासी और सक्रिय, दूसरा संकोची, भयभीत और दब्बू।
यह असमानता हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वास्तव में सभी मानव समान रूप से महान और भाग्यशाली हैं? यदि ईश्वर ने प्रत्येक मानव को समान रूप से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान की है, तो व्यवहार में यह सब क्यों नहीं दिखता? क्यों कुछ लोगों के पास अवसरों की भरमार है और कुछ के जीवन में अवसर नाममात्र भी नहीं?
इन अनेक कारणों में से एक प्रमुख कारण है—साहस का अभाव। साहस वह गुण है जो मानव जीवन की संभावनाओं को वास्तविकता में बदल देता है। साहस का अर्थ केवल शारीरिक शक्ति या जोखिम उठाना नहीं है, बल्कि भय, असफलता और आलोचना की आशंका के बावजूद सही निर्णय लेने और उस पर टिके रहने की क्षमता ही सच्चा साहस है।
जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतर केवल इतना है कि कुछ लोग चुनौतियों से घबरा जाते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें अवसर के रूप में स्वीकार करते हैं। डर हमें नए रास्तों पर चलने से रोकता है और हमारी क्षमताओं को सीमित कर देता है। अनेक लोग समाज, परिवार या असफलता के भय से अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। इसके विपरीत, साहसी व्यक्ति असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने की सीढ़ी मानता है।
साहस का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है—स्वयं को पहचानना। जब व्यक्ति अपनी क्षमताओं, कमजोरियों और आकांक्षाओं को समझ लेता है, तब उसके भीतर आत्मविश्वास जन्म लेता है। आत्मविश्वास ही साहस की नींव है। यह आत्मविश्वास अचानक नहीं आता, बल्कि छोटे‑छोटे साहसी निर्णयों और अनुभवों से धीरे‑धीरे विकसित होता है।
साहस केवल बड़े और क्रांतिकारी निर्णयों में ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के छोटे‑छोटे कार्यों में भी दिखाई देता है। सच बोलने का साहस, गलत का विरोध करने का साहस, अपनी गलती स्वीकार करने का साहस और जरूरतमंद की सहायता करने का साहस—ये सभी गुण व्यक्ति के चरित्र को मजबूत बनाते हैं। कई बार चुप रहना आसान होता है, लेकिन सही समय पर आवाज उठाना ही सच्चे साहस की पहचान है।
इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि समाज को नई दिशा देने वाले लोग साहसी ही होते हैं। महात्मा गांधी का अहिंसक संघर्ष, भगत सिंह का बलिदान और रानी लक्ष्मीबाई का अदम्य पराक्रम—ये सभी उदाहरण बताते हैं कि साहस भय से नहीं, बल्कि सिद्धांतों से संचालित होता है। इन महान व्यक्तियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।
साहस का एक महत्वपूर्ण पहलू है—डर का सामना करना। डर स्वाभाविक है, लेकिन उससे भागना समाधान नहीं है। जब व्यक्ति अपने डर को स्वीकार कर उसका सामना करता है, तो वही डर उसकी शक्ति बन जाता है। मंच पर बोलने से डरने वाला व्यक्ति निरंतर अभ्यास से एक प्रभावी वक्ता बन सकता है। इससे स्पष्ट है कि साहस अभ्यास से विकसित होने वाला गुण है।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में साहस का महत्व और भी बढ़ गया है। करियर का चुनाव, व्यवसाय की शुरुआत, नए विचारों को अपनाना—इन सभी के लिए साहस आवश्यक है। जो युवा जोखिम लेने से डरते हैं, वे प्रायः औसत जीवन तक ही सीमित रह जाते हैं, जबकि साहसी युवा प्रयोग करते हैं, असफल होते हैं, सीखते हैं और अंततः सफलता प्राप्त करते हैं।
साहस का गहरा संबंध नैतिकता से भी है। सही और गलत के बीच सही का चुनाव करना सदैव आसान नहीं होता। कई बार सही मार्ग कठिन और एकाकी होता है, जबकि गलत मार्ग आसान और भीड़भरा। ऐसे समय में नैतिक साहस ही व्यक्ति को सही दिशा में बनाए रखता है।
परिवार और समाज साहस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बच्चों को बचपन से स्वतंत्र सोच, प्रश्न पूछने और निर्णय लेने का अवसर मिले, तो उनमें साहस विकसित होता है। असफलता से डराने के बजाय प्रयास के लिए प्रेरित करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है।
अंततः कहा जा सकता है कि साहस करना सीखना जीवन को सही अर्थों में जीना सीखना है। साहस हमें भय की बेड़ियों से मुक्त करता है और हमारी छिपी हुई संभावनाओं को उजागर करता है। जब हम साहस के साथ आगे बढ़ते हैं, तो रास्ते स्वयं बनते जाते हैं। यही साहस मानव जीवन की महानता और भाग्यशाली होने के वास्तविक अर्थ को सार्थक करता है।