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सहानुभूति नहीं सहायता चाहिए।

भारत का राष्ट्रीय खेल भले ही हाॅकी है, लेकिन हाॅकी खिलाडि़यों के प्रदर्शन से तो ऐसा लगता है कि इसे राष्ट्रीय खेल का दर्जा समाप्त का दिया जाए, एवं किसी नये खेल को मौका दिया… सहानुभूति नहीं सहायता चाहिए।

वन्दना

मातेश्वरी तू धन्य है करूँ कैसे बखान। करूँ नित दिन पूजा तेरी माँ दे दो वरदान। तुम्हारी कृपा से माँ मैंने, यह दैव दुर्लभ मानव तन पाया। तुम्हारी दया से फिर इसको, बल-बुद्धि विद्या का… वन्दना

आम जनता एवं सरकार

लोकतांत्रिक गणराज्य भारत में क्या स्वतंत्रता प्राप्ति के 60 वर्ष के पूरे होने के बाद भी लोकतंत्र की जड़ें वास्तविक रूप में मजबूत हुई है? कागजों में तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य… आम जनता एवं सरकार

दोस्त दोस्त न रहा

दिल्ली पुलिस के ‘सुपरकॉप’ एन काउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी राजबीर सिंह की हत्या प्रोपर्टी डीलर विजय भारद्वाज द्वारा कर दी गई। वही विजय भारद्वाज जो उनके करीबी दोस्त थे और शायद दोस्त नहीं भी थे। एक… दोस्त दोस्त न रहा

गुरू गोविन्द दोऊँ खड़े

हमारे समाज में गुरू (शिक्षक) को गोविन्द (ईश्वर) से भी बढ़कर सम्मान दिया जाता है। इसलिए कहा गया – गुरू गोविन्द्र दोऊँ खड़े काके लागूँ पायं बलिहारी गुरू की जो गोविन्द दियो बताय।। अर्थात शिक्षक… गुरू गोविन्द दोऊँ खड़े

मशाल एवं इंसान

मशाल लेकर जो खड़ा है, ढ़ूँढ़तें हैं लोग उसे अंधेरों में। कितना नासमझ है ये दुनिया। ढ़ूँढ़तें हैं निशान राख के ढ़ेरों में। कल तक जो अपने थे आज, एक लकीर की वजह से खड़े… मशाल एवं इंसान

मानव

आज का मानव एक सरल रेखा पर दौड़ रहे हैं बेतहाशा। क्षण भर में वे अपने लक्ष्य को पाने का करते हैं आशा। उन्हें फुरसत नहीं हैं, पीछे देखने की। उन्हें जरूरत नहीं है, बगल… मानव

कल और आज

सिमटती गई शनैः शनैः तम की चादर। छिपते गये चोरों की भांति नभ से नभचर। फैल गई भू पर रवि रश्मियाँ। बनी पुष्प खिलकर कलियाँ। खगकुल करने लगे किलोल। मानो खोल रहा तानशाह नृप का… कल और आज

गाँधी तेरे देश में

असत्य, हिंसा, दुराग्रह की बहती है, सदा, अविरल त्रिवेणी गंगा। व्यभिचार, भ्रष्टाचार में गोता लगा रहे हैं, देश-सेवक जनसेवक होकर नंगा। पश्चिमी कूड़ा-कर्कटों को सजा रहे हैं,सब अपने परिवेश में। गाँधी तेरे देश में। महावीर… गाँधी तेरे देश में

खोजो तो जरा।

खोजो तो जरा। पथ्थरों में ढृढता। पुष्पों में कोमलता। झड़नों में चंचलता। हिमखंड में शीतलता। मंद समीर में मादकता। वाणी में मधुरता। लवों पर माधुर्यता। मित्रों में मित्रता। शत्रुतों में बैरता। दम्पतियों में सरसता। युवाओं… खोजो तो जरा।

होली आई

रंग-गुलाल और लेकर फाल्गुनी वयार। मधुमास में होली आई। आम्र मंजरों की गंध। दरख्त के नव पल्लवों के संग। चहुँ ओर हरियाली लाई। मधुमास में होली आई। प्रकृति रानी सजी नव परिधान में। गा रही… होली आई

अच्छी शिक्षाः अव्यवहारिक शिक्षा

गुड़गाँव के एक प्रतिष्ठित निजि विद्यालय के दो छात्र मिलकर एक छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक छात्र आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। हत्या करने वाले छात्र भी आठवीं के ही छात्र हैं।… अच्छी शिक्षाः अव्यवहारिक शिक्षा

आयें युग का मान बदल दें

सदियों से शोषित-दलित और उपेक्षित, उपजाति, कुरी गोत्र में खंडित। अशिक्षा, अंधविश्वास, रूढ़िवादिता से ग्रसित। बिन मांझी की नौका सी दिग्भ्रमित। कोटि-कोटि मानव का अज्ञान बदल दें। आयें युग का मान बदल दें। घूँट आँसुओं… आयें युग का मान बदल दें

अमर शहीद जुब्बा सहनी के प्रति

जुब्बा चैनपुर का ध्रुवतारा, भारत का अनमोल लाल था। दीन -हीन असहायों का बल, मूक ह्रदय का झंकृत ताल था। जुब्बा नाम था उस शूरवीर का, निरंतर जलाये थे जो क्रान्ति की मशाल। जुब्बा नाम… अमर शहीद जुब्बा सहनी के प्रति

ग़ज़ल (३)

आपका आना कितना खुशगवार लगता है, पर इस तरह छोड़कर जाते क्यों हैं? हम भी मोहब्बत कम नहीं करते, आप इस तरह प्यार जताते क्यों हैं? आपको भी कुछ पाने की तमन्ना है, हमे इस… ग़ज़ल (३)

ग़ज़ल (२)

इस तरह मुस्कुरा कर नहीं सजा दीजिए, जुर्म क्या है मेरा सरकार बता दीजिए। इतने करीब रहके भी कितने दूर-दूर हैं, इस फासला को एकबार मिटा दीजिए। ये प्यार है, छलावा है या और कुछ,… ग़ज़ल (२)

ग़ज़ल (१)

चारों तरफ हवा है कि हवा नहीं है। ये मर्ज ऐसा है कि इसकी दवा नहीं है। खुदकुशी कर रही हैं, रोज-रोज हजारों लडकियां , आशिकों की शिक़ायत है, उनके लिए महबूबा नहीं है। उनके… ग़ज़ल (१)

मेरी अभिलाषा

हर घर में दीप जले, हर उपवन में फूल खिले। भूलकर गिले शिकवे, आपस में सब गले मिले। मेरी अभिलाषा है। जाति धर्म के लिए न कोई लड़े, सीमा सरहद पर न बहे ख़ून. न… मेरी अभिलाषा

दौड़

जिन्दगी की इस दौड़ में कौन नहीं नजर आता है भागते हुए? नाम, यश, माया के मोह में नर्तकों सा नाचते हुए। खाली गोदाम हो गई तोड़ दिये दम हजारों भूख से तड़पते हुए, नाम… दौड़

हमें न चाँद चाहिए, न चमन चाहिए।

हमें न चाँद चाहिए , न चमन चाहिए। हमें अपने ही घर में अमन चाहिए। पड़ोसियों के ताप से कश्मीर पिघल रहा है। स्वच्छंदता के लिए असाम , नागालैंड मचल रहा है। आपसी वैमनस्यता की… हमें न चाँद चाहिए, न चमन चाहिए।

विश्व गुरू व्यास के प्रति

प्रति वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा को तुम्हारी याद लिए। आसमान में बदल उमड़ आते हैं। श्रद्धा – सुमन तुम्हें अर्पित करने को, वर्षा की कुछ बूंदे झड़ जाते हैं। मानव ही नहीं प्रकृति भी, तुम्हारे वियोग… विश्व गुरू व्यास के प्रति