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कवि क्या नहीं देखते

दशम अध्याय नीति : 4 कवि क्या नहीं देखते चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के चौथी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कवि क्या नहीं देेखते? स्त्रियां क्या नहीं करती? शराबी क्या नहीं बकते?… कवि क्या नहीं देखते

विद्या किसे प्राप्त होती है

दशम अध्याय नीति : 3 विद्या किसे प्राप्त होती है चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के तीसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्या बड़ी मेहनत से प्राप्त होती है। विद्या प्राप्त करना और… विद्या किसे प्राप्त होती है

सोच विचार कर काम करना चाहिए

दशम अध्याय नीति : 2 सोच विचार कर काम करना चाहिए चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के दूसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अच्छी तरह देखकर ही धरती पर पांव रखना चाहिए, कपड़े… सोच विचार कर काम करना चाहिए

​विद्या सबसे बड़ा धन है

दशम अध्याय नीति : 1 ​विद्या सबसे बड़ा धन है चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के पहली नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्वान व्यक्ति यदि निर्धन हो तो भी उसे हीन नहीं समझना… ​विद्या सबसे बड़ा धन है

मर्दन से गुण बढ़ते हैं

नवम अध्याय नीति : 13 &14 मर्दन से गुण बढ़ते हैं चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के तेरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गन्ने को और तिलों को पेरे जाने से, शूद्रों से… मर्दन से गुण बढ़ते हैं

सौंदर्य की हानि

नवम अध्याय नीति : 12 सौंदर्य की हानि चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के बारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अपने हाथ से बनायी माला नहीं पहननी चाहिए, अपने हाथ से घिसा हुआ… सौंदर्य की हानि

महापुरूषों को जीवन

नवम अध्याय नीति : 11 महापुरूषों को जीवन चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि महापुरूषों या विद्वानों का प्रात:काल जुए की प्रसंग यानि महाभारत की कथा में… महापुरूषों को जीवन

आडंबर भी आवश्यक है

नवम अध्याय नीति :10 आडंबर भी आवश्यक है चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के दसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि चाहे सांप में विष हो या न हो, इसे कौन जानता है किंतु… आडंबर भी आवश्यक है

इनसे डरना नहीं चाहिए

नवम अध्याय नीति : 9 इनसे डरना नहीं चाहिए चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के नौवीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी उंचे पद पर न हो और धनवान भी न… इनसे डरना नहीं चाहिए

इनसे कोई हानि नहीं

नवम अध्याय नीति : 8 इनसे कोई हानि नहीं चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के आठवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वेदों का अध्ययन ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है, किन्तु… इनसे कोई हानि नहीं

इन्हें जगाएं नहीं

नवम अध्याय नीति :7 इन्हें जगाएं नहीं चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के सातवीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि सांप, राजा, शेर, बर्र (ततैया), बच्चा, किसी दूसरे व्यक्ति का कुत्ता तथा मूर्ख… इन्हें जगाएं नहीं

इन्हें सोने न दें

नवम अध्याय नीति : 6 इन्हें सोने न दें चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के छठी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थी को,नौकर को, रास्ते में सोये हुए राहगीर को, भूखे व्यक्ति को,… इन्हें सोने न दें

विद्या का सम्मान

नवम अध्याय नीति : 5 विद्या का सम्मान चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के पाँचवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्वान लोग पहले ही गणित—विद्या से सूर्य और चन्द्रमा के ग्रहणों के बारे… विद्या का सम्मान

सबसे बड़ा सुख

नवम अध्याय नीति: 4 सबसे बड़ा सुख चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के चौथी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि औषधियों में गिलोय महत्वपूर्ण है। भोजन करने और उसे पचाने की शक्ति सदा बनी… सबसे बड़ा सुख

विडंबना

नवम अध्याय नीति : 3 विडंबना चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के तीसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सोना कीमती धातु है पर इसमें सुगंध नहीं होती। गन्ने में मिठास होती है, पर… विडंबना

दुष्ट का नाश

नवम अध्याय नीति : 2 दुष्ट का नाश चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के दूसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो दुष्ट पहले एक दूसरे को अपने भेद बता देते हैं और फिर… दुष्ट का नाश

मोक्ष

नवम अध्याय नीति : 1 मोक्ष चाणक्य नीति के नवम अघ्याय के पहली नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि मनुष्य मोक्ष चाहता है तो सबसे पहले अपनी इन्द्रियों के विषयों को विष समझकर… मोक्ष

इनसे हानि ही होती है

अष्टम अध्याय नीति : 22 इनसे हानि ही होती है चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के बाइसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस राजा के राज्य में अन्न की कमी हो, जो यज्ञ… इनसे हानि ही होती है

विद्वान सब जगह पूजा जाता है।

अष्टम अध्याय नीति : 19—21 विद्वान सब जगह पूजा जाता है। चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के उन्नीसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्वान का ही सम्मान होता है, खानदान का नहीं। नीच… विद्वान सब जगह पूजा जाता है।

दुर्गुणों का दुष्प्रभाव

अष्टम अध्याय नीति : 18 दुर्गुणों का दुष्प्रभाव चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के अठारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि असंतुष्ट ब्राह्मण तथा संतुष्ट राजा नष्ट हो जाते हैं। लज्जा करने वाली वैश्या… दुर्गुणों का दुष्प्रभाव

इन्हें शुद्ध समझना चाहिए

अष्टम अध्याय नीति : 17 इन्हें शुद्ध समझना चाहिए चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के सतरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि भूमिगत जल शुद्ध होता है, पतिव्रता स्त्री शुद्ध होती है। प्रजा का… इन्हें शुद्ध समझना चाहिए

दुर्गुण सदगुणों को नष्ट कर देती है

अष्टम अध्याय नीति : 16 दुर्गुण सदगुणों को नष्ट कर देती है चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के सौलहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति कितना ही रूपवान यानि सुंदर हो यदि गुणवान… दुर्गुण सदगुणों को नष्ट कर देती है

इनसे शोभा बढ़ती है

अष्टम अध्याय नीति : 15 इनसे शोभा बढ़ती है चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के पंद्रहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गुणवान व्यक्ति के गुण ही उसकी सुंदरता होते हैं। अच्छा आचरण कुल… इनसे शोभा बढ़ती है

संतोष बड़ी चीज है

अष्टम अध्याय नीति : 14 संतोष बड़ी चीज है चाणक्य नीति के अष्टम अघ्याय के चौदह नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है इसे यमराज के समान ही… संतोष बड़ी चीज है