प्रसिद्ध उद्योगपति पद्मश्री श्रीमती कल्पना सरोज (Mrs. Kalpana Saroj)

जब हिम्मत करे इंसान । तब सहायता करे भगवान।। दोस्तो आप सबने शूटर दादी के नाम से मशहूर चंद्रो तोमर का नाम तो अवश्य सुना

परदुख कातरता

सप्तदश अध्याय नीति : 18 परदुख कातरता चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के अठारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि राजा, वेश्या, यमराज, आग,

गुणहीन पशु

सप्तदश अध्याय नीति : 16—17 गुणहीन पशु चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के सोलहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि भोजन, नींद, भय तथा

शोभा

सप्तदश अध्याय नीति : 12—14 शोभा चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के बारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि नाई के घर जाकर दाढ़ी,

सुंदरता

सप्तदश अध्याय नीति : 11 सुंदरता चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हाथों की सुंदरता दान से

कुपत्नी

सप्तदश अध्याय नीति : 9 कुपत्नी चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के  नवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पति की आज्ञा के बिना

दुष्टता

सप्तदश अध्याय नीति : 8 दुष्टता चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के आठवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सर्प के दांत में विष

लाचारी

सप्तदश अध्याय नीति : 6 लाचारी चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के  छठी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि शक्तिहीन व्यक्ति साधु बन जाता

विडंबना

सप्तदश अध्याय नीति : 5 विडंबना चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के  पाँचवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि रत्नों की खान समुद्र शंख

तप की महिमा

सप्तदश अध्याय नीति : 3—4 तप की महिमा चाणक्य नीति के सप्तदश अघ्याय के तीसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि तप सबसे शक्तिशाली

मीठे बोल

षष्ठदश अध्याय नीति : 17—19 मीठे बोल चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के सतरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मधुर बचन बोलना, दान

निर्धनता

षष्ठदश अध्याय नीति : 16 निर्धनता चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के सौलहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि निर्धनता जीवन का अभिशाप है।

याचकता

षष्ठदश अध्याय नीति : 15 याचकता चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के  पंद्रहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मांगने से मर जाना अच्छा

सार्थक दान

षष्ठदश अध्याय नीति : 14 सार्थक दान चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के चौदहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि योग्य तथा जरूरतमंद को

अनुचित धन

षष्ठदश अध्याय नीति : 11—13 अनुचित धन चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के  ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो धन किसी को

महानता

षष्ठदश अध्याय नीति : 6—10 महानता चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के छठी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गुणों से ही मनुष्य बड़ा

संतान

षष्ठदश अध्याय नीति : 1 संतान चाणक्य नीति के षष्ठदश अघ्याय के पहली नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो मनुष्य न तो मोक्ष

दृढ़ता

पंचदश अध्याय नीति : 18 दृढ़ता चाणक्य नीति के पंचदश अघ्याय के अठारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कट जाने के बाद भी

प्रेम बंधन

पंचदश अध्याय नीति : 17 प्रेम बंधन चाणक्य नीति के पंचदश अघ्याय के सतरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बंधन तो अनेक हैं,

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