विश्व गुरू व्यास के प्रति
प्रति वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा को तुम्हारी याद लिए। आसमान में बदल उमड़ आते हैं। श्रद्धा – सुमन तुम्हें अर्पित करने को, वर्षा की कुछ बूंदे झड़ जाते हैं। मानव ही नहीं प्रकृति भी, तुम्हारे वियोग… विश्व गुरू व्यास के प्रति
प्रति वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा को तुम्हारी याद लिए। आसमान में बदल उमड़ आते हैं। श्रद्धा – सुमन तुम्हें अर्पित करने को, वर्षा की कुछ बूंदे झड़ जाते हैं। मानव ही नहीं प्रकृति भी, तुम्हारे वियोग… विश्व गुरू व्यास के प्रति