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इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के

इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहना सच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना… इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्‌ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी … धरती पे… साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा ।

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा । हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा ।। गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में । समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा ।।… सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा ।

वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् सस्य श्यामलां मातरंम् . शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् . सुखदां वरदां मातरम् ॥ कोटि कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले द्विसप्त कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले के बोले मा… वन्दे मातरम्

जन गण मन अधिनायक जय हे

जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशिष मागे गाहे तव जय गाथा… जन गण मन अधिनायक जय हे

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

झण्डा ऊँचा रहे हमारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा-2 झण्डा ऊँचा रहे हमारा सदा शक्ति बरसानेवाला प्रेम सुधा सरसानेवाला वीरों को हर्षानेवाला मार्तभूमि का तन-मन सारा -२ झण्डा ऊँचा … स्वतन्त्रता के भीषण रण में रख… विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

हिंद देश का प्यारा झंडा ऊँचा सदा रहेगा,

हिंद देश का प्यारा झंडा ऊँचा सदा रहेगा, ऊँचा सदा रहेगा झंडा ,ऊँचा सदा रहेगा !! शान हमारी यह झंडा है यह अरमान हमारा , यह बालपौरूश है सदियों का ,यह बलिदान हमारा, जहाँ जहाँ… हिंद देश का प्यारा झंडा ऊँचा सदा रहेगा,

राजभाषा संकल्प, 1968

संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित निम्नलिखित सरकारी संकल्प आम जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है — संकल्प “जब‡क संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी रहेगी और उसके अनुच्छेद 351… राजभाषा संकल्प, 1968

महामहिम राष्ट्रपति के आदेश, 1960

(गृह मंत्रालय की दि. 27 अप्रैल, 1960 की अधिसूचना संख्या 2य8य60-रा.भा., की प्रतिलिपि) अधिसूचना राष्ट्रपति का निम्नलिखित आदेश आम जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है :- नई दिल्ली, दिनाक 27 अप्रैल, 1960 आदेश लोकसभा… महामहिम राष्ट्रपति के आदेश, 1960

सांविधानिक प्रावधान

भारत के संविधान में राजभाषा से संबंधित भाग-17 अध्याय 1–संघ की भाषा अनुच्छेद 120. संसद् में प्रयोग की जाने वाली भाषा – (1) भाग 17 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु अनुच्छेद 348… सांविधानिक प्रावधान

राजभाषा अधिनियम, 1963

राजभाषा अधिनियम, 1963 (यथासंशोधित,1967) (1963 का अधिनियम संख्यांक 19) उन भाषाओं का, जो संघ के राजकीय प्रयोजनों, संसद में कार्य के संव्यवहार, केन्द्रीय और राज्य अधिनियमों और उच्च न्यायालयों में कतिपय प्रयोजनों के लिए प्रयोग… राजभाषा अधिनियम, 1963

राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम,1976 (यथा संशोधित, 1987)

सा.का.नि. 1052 –राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थातः- 1. संक्षिप्त… राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम,1976 (यथा संशोधित, 1987)

सहानुभूति नहीं सहायता चाहिए।

भारत का राष्ट्रीय खेल भले ही हाॅकी है, लेकिन हाॅकी खिलाडि़यों के प्रदर्शन से तो ऐसा लगता है कि इसे राष्ट्रीय खेल का दर्जा समाप्त का दिया जाए, एवं किसी नये खेल को मौका दिया… सहानुभूति नहीं सहायता चाहिए।

वन्दना

मातेश्वरी तू धन्य है करूँ कैसे बखान। करूँ नित दिन पूजा तेरी माँ दे दो वरदान। तुम्हारी कृपा से माँ मैंने, यह दैव दुर्लभ मानव तन पाया। तुम्हारी दया से फिर इसको, बल-बुद्धि विद्या का… वन्दना

आम जनता एवं सरकार

लोकतांत्रिक गणराज्य भारत में क्या स्वतंत्रता प्राप्ति के 60 वर्ष के पूरे होने के बाद भी लोकतंत्र की जड़ें वास्तविक रूप में मजबूत हुई है? कागजों में तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य… आम जनता एवं सरकार

दोस्त दोस्त न रहा

दिल्ली पुलिस के ‘सुपरकॉप’ एन काउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी राजबीर सिंह की हत्या प्रोपर्टी डीलर विजय भारद्वाज द्वारा कर दी गई। वही विजय भारद्वाज जो उनके करीबी दोस्त थे और शायद दोस्त नहीं भी थे। एक… दोस्त दोस्त न रहा

गुरू गोविन्द दोऊँ खड़े

हमारे समाज में गुरू (शिक्षक) को गोविन्द (ईश्वर) से भी बढ़कर सम्मान दिया जाता है। इसलिए कहा गया – गुरू गोविन्द्र दोऊँ खड़े काके लागूँ पायं बलिहारी गुरू की जो गोविन्द दियो बताय।। अर्थात शिक्षक… गुरू गोविन्द दोऊँ खड़े

मशाल एवं इंसान

मशाल लेकर जो खड़ा है, ढ़ूँढ़तें हैं लोग उसे अंधेरों में। कितना नासमझ है ये दुनिया। ढ़ूँढ़तें हैं निशान राख के ढ़ेरों में। कल तक जो अपने थे आज, एक लकीर की वजह से खड़े… मशाल एवं इंसान

मानव

आज का मानव एक सरल रेखा पर दौड़ रहे हैं बेतहाशा। क्षण भर में वे अपने लक्ष्य को पाने का करते हैं आशा। उन्हें फुरसत नहीं हैं, पीछे देखने की। उन्हें जरूरत नहीं है, बगल… मानव

कल और आज

सिमटती गई शनैः शनैः तम की चादर। छिपते गये चोरों की भांति नभ से नभचर। फैल गई भू पर रवि रश्मियाँ। बनी पुष्प खिलकर कलियाँ। खगकुल करने लगे किलोल। मानो खोल रहा तानशाह नृप का… कल और आज