गाँधी तेरे देश में
असत्य, हिंसा, दुराग्रह की बहती है, सदा, अविरल त्रिवेणी गंगा। व्यभिचार, भ्रष्टाचार में गोता लगा रहे हैं, देश-सेवक जनसेवक होकर नंगा। पश्चिमी कूड़ा-कर्कटों को सजा रहे हैं,सब अपने परिवेश में। गाँधी तेरे देश में। महावीर… गाँधी तेरे देश में