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द्विज

एकादश अध्याय नीति : 12 द्विज चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के बारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो ब्राह्मण दिन में केवल एक बार भोजन करता है और उसी से संतुष्ट रहता… द्विज

ऋषि

एकादश अध्याय नीति : 11 ऋषि चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऋषि उस ब्राह्मण को कहते हैं जो घर छोड़कर वन में रहने लगता है, बिना… ऋषि

विद्यार्थियों के लिए वर्जित

एकादश अध्याय नीति : 10 विद्यार्थियों के लिए वर्जित चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के दसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि स्त्री सहवास, क्रोध करना, लोभ करना, स्वाद के लिए भोजन करना, श्रृंगार… विद्यार्थियों के लिए वर्जित

मौन

एकादश अध्याय नीति : 9 मौन चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के नौवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मौन रहना एक प्रकार की तपस्या है। जो व्यक्ति केवल एक वर्ष तक मौन रहता… मौन

गुण ग्राहकता

एकादश अध्याय नीति : 8 गुण ग्राहकता चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के आठवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो जिसके गुणों को नहीं जानता वह यदि उसकी निंदा करें तो इसमें आश्चर्य… गुण ग्राहकता

आदत नहीं बदलती

एकादश अध्याय नीति : 6—7 आदत नहीं बदलती चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के छठी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुष्ट को चाहे कितना ही सिखाओ—पढ़ाओ उसे सज्जन नहीं बनाया जा सकता। क्योंकि… आदत नहीं बदलती

गुण तथा प्रवृति

एकादश अध्याय नीति : 5 गुण तथा प्रवृति चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के पाँचवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिसे घर से अधिक प्रेम होता है, वह विद्या प्राप्त नहीं कर सकता।… गुण तथा प्रवृति

समय

एकादश अध्याय नीति : 4 समय चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के चौथी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कलियुग के दस हजार वर्ष पूरे हो जाने पर भगवान विष्णु पृथ्वी को छोड़कर अपने… समय

सूरत से सीरत भली

एकादश अध्याय नीति : 3 सूरत से सीरत भली चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के तीसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विशाल शरीरवाला होने पर भी हाथी को अंकुश से वश में किया… सूरत से सीरत भली

नाश

एकादश अध्याय नीति : 2 नाश चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के दूसरी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस देश में न्याय—कानून की व्यवस्था चौपट हो जाती है, वह देश धीरे —धीरे नष्ट… नाश

संस्कार का प्रभाव

एकादश अध्याय नीति : 1 संस्कार का प्रभाव चाणक्य नीति के एकादश अघ्याय के पहली नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दान देने का स्वभाव, सबके साथ मधुरता से बातें करना, धीरज तथा सही… संस्कार का प्रभाव

चिंता चिता समान

दशम अध्याय नीति : 20 चिंता चिता समान चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के बीसवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ​चिंता करने से रोग बढ़ते हैं। दूध पीने से मनुष्य का शरीर बढ़ता… चिंता चिता समान

घी सबसे बड़ी शक्ति शक्तिशाली

दशम अध्याय नीति : 19 घी सबसे बड़ी शक्ति शक्तिशाली चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के उन्नीसावीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि साधारण भोजन से आटे में दस गुनी अधिक शक्ति होती है।… घी सबसे बड़ी शक्ति शक्तिशाली

सब ईश्वर की माया है

दशम अध्याय नीति : 17—18 सब ईश्वर की माया है चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के सतरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मुझे अपने जीवन में कोई चिंता नहीं है। क्योंकि भगवान को… सब ईश्वर की माया है

बुद्धि ही बल है

दशम अध्याय नीति : 16 बुद्धि ही बल है चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के सौलहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति के पास बुद्धि है, उसी के पास बल भी होता… बुद्धि ही बल है

भावुकता से बचना चाहिए

दशम अध्याय नीति : 15 भावुकता से बचना चाहिए चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के पंद्रहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक ही वृक्ष पर बैठे हुए अनेक रंगों के पक्षी सुबह होने… भावुकता से बचना चाहिए

घर में ही त्रिलोक का सुख

दशम अध्याय नीति : 14 घर में ही त्रिलोक का सुख चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के चौदहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस मनुष्य की मां का गुण लक्ष्मी के समान तथा… घर में ही त्रिलोक का सुख

ब्राह्मण धर्म

दशम अध्याय नीति : 13 ब्राह्मण धर्म चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के तेरहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि संध्या पूजा ब्राह्मण का मुख्य कार्य है। ऐसा न करनेवाला ब्राह्मण को ब्राह्मण नहीं… ब्राह्मण धर्म

निर्धनता अभिशाप है

दशम अध्याय नीति : 12 निर्धनता अभिशाप है चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के बारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य हिंसक जीवों से घिरे वन में रह ले, वृक्ष पर घर बनाकर… निर्धनता अभिशाप है

दुश्मनी का परिणाम

दशम अध्याय नीति : 11 दुश्मनी का परिणाम चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के ग्यारहवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि साधु—महात्माओं से शत्रुता करने पर मृत्यु होती है। शत्रु से द्वेष करने पर… दुश्मनी का परिणाम

उपदेश सुपात्र को ही देना चाहिए

दशम अध्याय नीति : 8—10 उपदेश सुपात्र को ही देना चाहिए चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के आठवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति के भीतर समझने की शक्ति नहीं है, ऐसे… उपदेश सुपात्र को ही देना चाहिए

गुणहीन मनुष्य पशु समान

दशम अध्याय नीति: 7 गुणहीन मनुष्य पशु समान चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के सातवीं नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो मनुष्य विद्या का अध्ययन नहीं करते हैं, जो तपस्या नहीं करते हैं,… गुणहीन मनुष्य पशु समान

लोभी से कुछ नहीं मांगे

दशम अध्याय नीति : 6 लोभी से कुछ नहीं मांगे चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के छठी  नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोभी व्यक्तियों के लिए भीख, चंदा तथा दान मांगनेवाला व्यक्ति शत्रुरूप… लोभी से कुछ नहीं मांगे

भाग्य

दशम अध्याय नीति : 5 भाग्य चाणक्य नीति के दशम अघ्याय के पाँचवी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि भाग्य बड़ा बलवान होता है। यह एक भिखारी को पल भर में राजा बना देता… भाग्य